Rasulullah menuangkannya ke dalam bejana seraya meletakkan kedua telapak tangannya, maka serta merta keluarlah air dari ujung jemari beliau
Imam Muslim : 4226
حَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ حَدَّثَنَا مُعَاذٌ يَعْنِي ابْنَ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصْحَابَهُ بِالزَّوْرَاءِ قَالَ وَالزَّوْرَاءُ بِالْمَدِينَةِ عِنْدَ السُّوقِ وَالْمَسْجِدِ فِيمَا ثَمَّهْ دَعَا بِقَدَحٍ فِيهِ مَاءٌ فَوَضَعَ كَفَّهُ فِيهِ فَجَعَلَ يَنْبُعُ مِنْ بَيْنِ أَصَابِعِهِ فَتَوَضَّأَ جَمِيعُ أَصْحَابِهِ قَالَ قُلْتُ كَمْ كَانُوا يَا أَبَا حَمْزَةَ قَالَ كَانُوا زُهَاءَ الثَّلَاثِ مِائَةِ و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ بِالزَّوْرَاءِ فَأُتِيَ بِإِنَاءِ مَاءٍ لَا يَغْمُرُ أَصَابِعَهُ أَوْ قَدْرَ مَا يُوَارِي أَصَابِعَهُ ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ هِشَامٍ
मोका [अबू गस्सान अल मिसमाई] बताइस है; हमका [मुआज़] अर्थात् इब्न हिशम बताइस है; [कतादाह] के [मेरे पिता] का बताइस है; हमसे [अनस बिन मलिक] बताइन हैं कि नबीयूल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अऊर उनके साथी ज़ौरा मा रहे -अनस ने कहा; 'जौरा' बाजार के पास मदीना स्थित है और उसके पास एक मस्जिद है-, उन्होंने एक कटोरी पानी मांगी। यहिके बाद, उ आपन हथेली कटोरा मा रखिन। कुछ देर बाद ही उनके उंगलियन के बीच से पानी बह गवा, जेसे सब दोस्त वजू कर सकै। अनस कहिन; 'हम एक बार पूछे रहेन; 'वास्तव मा उ समय उ लोग केतना रहे, हे अबू हमजा? ' अबू हमजा ने जवाब दिया; 'लगभग तीन सौ मनई'। अऊर हमसे [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] बताइस है; हमका [मुहम्मद बिन जाफर] बताइस है; हमका [सैद] से [कतदाह] से [अनस] से बतावा गा है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार ज़ौरा मा रहे, फिर ओनके पास एक बर्तन लाया गा रहा जेकर पानी मुश्किल से ओनके उंगली का ढक सकत रहा, -फिर उ एक हदीस का जिक्र किहिन जवन हिशम के हदीस से मिलत जुलत है।-