Setiap yang memabukkan adalah khamr, dan setiap khamr adalah haram
Imam Muslim : 3732
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي الدَّرَاوَرْدِيَّ عَنْ عُمَارَةَ بْنِ غَزِيَّةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ رَجُلًا قَدِمَ مِنْ جَيْشَانَ وَجَيْشَانُ مِنْ الْيَمَنِ فَسَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ شَرَابٍ يَشْرَبُونَهُ بِأَرْضِهِمْ مِنْ الذُّرَةِ يُقَالُ لَهُ الْمِزْرُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوَ مُسْكِرٌ هُوَ قَالَ نَعَمْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ مُسْكِرٍ حَرَامٌ إِنَّ عَلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ عَهْدًا لِمَنْ يَشْرَبُ الْمُسْكِرَ أَنْ يَسْقِيَهُ مِنْ طِينَةِ الْخَبَالِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَا طِينَةُ الْخَبَالِ قَالَ عَرَقُ أَهْلِ النَّارِ أَوْ عُصَارَةُ أَهْلِ النَّارِ
हमसे कहिन है [कुतैबा बिन सईद] हमसे कहिन है [अब्दुल अजीज] - अर्थात् अद दरावर्डी - ['उम्मारा बिन गाजिया] से [अबू अज जुबैर] से [जाबिर] से, कि एक आदमी जैसियन क्षेत्र से आवा रहा, अऊर जैसियन यमन का एक क्षेत्र है, फिर उ पैगम्बर से पूछिन कि उ आमतौर पर वल्लाह वल्लाल के बारे मा पीयत हैं उनके देश मा, जवन दबाए गए आटे से बना अहै जेका आमतौर पर मिजर कहा जात है। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'क्या यह मादक है?' ऊ जवाब दिहिस, 'हाँ'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'हर नशीला पदार्थ हराम है, बेशक अल्लाह वादा करत है कि जे भी नशीली पेय पीये, उ ओका थिनतुल खबल पियै का देई'। उन्होंने पूछा कि या रसूल अल्लाह थिनतुल खबल क्या है? उ जवाब दिहिन: 'नरक के निवासियन के पसीना। या नरक के निवासियन के -पसीना-'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 4415, 4416, 4598, 4599, 4631, 5390, 5472, 5557, 5903, 5941, 6450, 9174, 11656, 11751, 14351, 18817, 18842, 18895, 18908, 22953, 23511, 23843, 24396, 24704, 25416
Imam Bukhari : 235, 3997, 5157, 5158, 5169
Imam Muslim : 3727, 3728, 3729, 3730, 3731, 3732, 3733, 3734, 3735
Imam Abu Dawud : 3194, 3195, 3196, 3197, 3198, 3199, 3200, 3201, 3202
Imam Tirmidzi : 1784, 1785, 1786, 1787, 1788, 1789
Imam Nasa'i : 5488, 5489, 5490, 5491, 5492, 5493, 5494, 5497, 5498, 5499, 5500, 5501, 5503, 5504, 5505, 5507, 5508, 5509, 5510, 5511, 5512, 5587, 5591, 5592, 5603, 5604, 5605, 5613, 5632
Imam Ibnu Majah : 3377, 3378, 3379, 3380, 3381, 3382, 3383, 3396
Imam Malik : 1331
Imam Darimi : 2005, 2006