Setiap yang memabukkan adalah khamr, dan setiap khamr adalah haram
Imam Muslim : 3730
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو سَمِعَهُ مِنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَهُ وَمُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ فَقَالَ لَهُمَا بَشِّرَا وَيَسِّرَا وَعَلِّمَا وَلَا تُنَفِّرَا وَأُرَاهُ قَالَ وَتَطَاوَعَا قَالَ فَلَمَّا وَلَّى رَجَعَ أَبُو مُوسَى فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لَهُمْ شَرَابًا مِنْ الْعَسَلِ يُطْبَخُ حَتَّى يَعْقِدَ وَالْمِزْرُ يُصْنَعُ مِنْ الشَّعِيرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ مَا أَسْكَرَ عَنْ الصَّلَاةِ فَهُوَ حَرَامٌ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्बाद] हमसे [सुफयान] [अमरू] से कहिन है कि उ [सैद बिन अबू बुरदा] से [अपने पिता] से [अपने दादा] से सुने हैं, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें मुअद्ज के साथ यमन के धरती पर भेजा है, फिर उन्होंन दुइनौ से कहिन: 'उनका भलाई देइ अऊर हर नया सिखावा आसान बनावै। ओनका अऊर ओनका भागै मत करावा'। अऊर लागत है कि उ इ भी कहिन: 'अऊर तुम दुइनौ का एक दूसरे से झगड़ा न करै दे'। जब अबू मूसा लौटिन, तौ उ कहिन, 'हे अल्लाह के रसूल, वाकई उ लोग - यमन के लोग - शहद से पेय बनावै के आदी हैं जेका उबाला जात है जब तक कि उ गाढ़ा न होइ जाय अऊर आटा से बना शराब?' तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'हर कुछ जवन मादक है - नमाज मा बाधा डालत है, उ हराम है'।