Dimaafkannya pelaku qishas menjadi sebab gugurnya hukuman dan diberi ganjaran besar di sisi Allah
Imam Muslim : 3174
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَفَّانُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ أُخْتَ الرُّبَيِّعِ أُمَّ حَارِثَةَ جَرَحَتْ إِنْسَانًا فَاخْتَصَمُوا إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْقِصَاصَ الْقِصَاصَ فَقَالَتْ أُمُّ الرَّبِيعِ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُقْتَصُّ مِنْ فُلَانَةَ وَاللَّهِ لَا يُقْتَصُّ مِنْهَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُبْحَانَ اللَّهِ يَا أُمَّ الرَّبِيعِ الْقِصَاصُ كِتَابُ اللَّهِ قَالَتْ لَا وَاللَّهِ لَا يُقْتَصُّ مِنْهَا أَبَدًا قَالَ فَمَا زَالَتْ حَتَّى قَبِلُوا الدِّيَةَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِنْ عِبَادِ اللَّهِ مَنْ لَوْ أَقْسَمَ عَلَى اللَّهِ لَأَبَرَّهُ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन हैं ['अफ्फान बिन मुस्लिम] हमसे कहिन हैं [हम्मद] हमसे [थाबित] [अनस] से कहिन हैं, कि रुबाई के बहिन, ओकर महतारी हरितसाह, एक बार केहू का घायल कइ दिहिन। फिर उनकर सब परिवार पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से ई बात के शिकायत करै गें, तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'किशाश के कानून लागू करा, क़ाशास के कानून लागू करा'। लेकिन उम्म रुबैयी' ने ई सजा पर आपत्ति जताई अऊर कहिन, 'हे अल्लाह के रसूल, का तुम फुलाना पर क़िशाश दंड लगावै जा रहे हौ? अल्लाह के खातिर, ओनके ऊपर क़िशाश सजा न लगावा'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सुभानल्लाह, हे उम्म रुबैयी', का क़िशाश सजा पहिले से ही अल्लाह से प्रावधान नाहीं है?' उम्म रुबायी' ने जवाब दिया, 'अल्लाह के कसम, हे अल्लाह के रसूल, ओका हमेशा के लिए क़िशाह के सजा न मिलै'। इ बीच, उम् रुबैयी तब तक जोर देत रहे जब तक कि पीड़ित के परिवार दियत स्वीकार करै का तैयार नाइ होइ गा। अंत मा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा, अल्लाह के सेवकन मा अइसन लोग हैं जे अगर उ अल्लाह के नाम से कसम खाइहैं, तौ उ अल्लाह के भलाई करिहैं'।