Puasa adalah untuk Allah dan Allah sendiri yang membalasnya
Imam Muslim : 1945
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الْأَشَجُّ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ عَمَلِ ابْنِ آدَمَ يُضَاعَفُ الْحَسَنَةُ عَشْرُ أَمْثَالِهَا إِلَى سَبْعمِائَة ضِعْفٍ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ إِلَّا الصَّوْمَ فَإِنَّهُ لِي وَأَنَا أَجْزِي بِهِ يَدَعُ شَهْوَتَهُ وَطَعَامَهُ مِنْ أَجْلِي لِلصَّائِمِ فَرْحَتَانِ فَرْحَةٌ عِنْدَ فِطْرِهِ وَفَرْحَةٌ عِنْدَ لِقَاءِ رَبِّهِ وَلَخُلُوفُ فِيهِ أَطْيَبُ عِنْدَ اللَّهِ مِنْ رِيحِ الْمِسْكِ
अऊर हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमसे [अबू मुआविया] अऊर [वाकी'] [अल अमासी] [अबू सालिह] से [अबू हुरैराह] रदलियाल्लाहु अन्हू से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आदम का संतान हर काम का इनाम दुगुना हो जात है। एक प्रकार के अच्छाई का दस से सात सौ गुना इनाम मिलत है। अल्लाह अज्जा वजल्ला कहत है; 'व्रत के अलावा, काहे से कि उपवास मोर खातिर है अऊर मैं ही एकर इनाम देब। काहे से कि, उ मोर कारण आपन वासना अऊर भूख छोड़ दिहिस है'। औ उपवास करै वालेन के ताईं दुइ सुख हैं। जब ऊ व्रत तोड़त है तौ खुशी, अऊर जब ऊ अपने रब्ब से मिलत है तौ खुशी। सचमुच, रोजा रखै वाले के मुँह के गंध अल्लाह के नजर मा कस्तूरी के गंध से ज्यादा सुगंधित होत है।'