Bahwa Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam pernah menshalatkan Suhail bin baidla` di masjid
Imam Muslim : 1616
و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ يُحَدِّثُ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا لَمَّا تُوُفِّيَ سَعْدُ بْنُ أَبِي وَقَّاصٍ أَرْسَلَ أَزْوَاجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَمُرُّوا بِجَنَازَتِهِ فِي الْمَسْجِدِ فَيُصَلِّينَ عَلَيْهِ فَفَعَلُوا فَوُقِفَ بِهِ عَلَى حُجَرِهِنَّ يُصَلِّينَ عَلَيْهِ أُخْرِجَ بِهِ مِنْ بَابِ الْجَنَائِزِ الَّذِي كَانَ إِلَى الْمَقَاعِدِ فَبَلَغَهُنَّ أَنَّ النَّاسَ عَابُوا ذَلِكَ وَقَالُوا مَا كَانَتْ الْجَنَائِزُ يُدْخَلُ بِهَا الْمَسْجِدَ فَبَلَغَ ذَلِكَ عَائِشَةَ فَقَالَتْ مَا أَسْرَعَ النَّاسَ إِلَى أَنْ يَعِيبُوا مَا لَا عِلْمَ لَهُمْ بِهِ عَابُوا عَلَيْنَا أَنْ يُمَرَّ بِجَنَازَةٍ فِي الْمَسْجِدِ وَمَا صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى سُهَيْلِ بْنِ بَيْضَاءَ إِلَّا فِي جَوْفِ الْمَسْجِدِ
अऊर हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन हातिम] हमसे कहिस है [बहज] हमसे कहिस है [वुहैब] हमसे कहिस है [मूसा बिन उकबाह] से [अब्दुल वाहिद] से [अब्बाद बिन अब्दुल्लाह बिन जुबैर] उ [ऐस्याह] से कहिस है कि जब सद बिन अबी वकाश मर गए, त पैगम्बर साहब के पंचन का आदेश मिला लोग ओकरे शरीर का मस्जिद मा नमाज पढ़ै के लिए ले जाय -वहाँ-। उइ ई निवेदन का पूरा किहिन, यहिसे उइ लाश का पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पत्नियन के कमरा के सामने लइ आए ताकि उइ नमाज पढ़ सकै। फिर ओका सीट से जुड़े लाश के दरवाजा से वापस बाहर लइ जावा गा रहा। कुछ देर बाद, नबी के पत्नियन तक खबर पहुँची कि बहुत लोग ओनके कामन के आलोचना करत हैं। कहिन, 'लाश का मस्जिद नाहीं लइ जाय सकत'। भीड़ के बात ऐसियाह तक भी पहुँची। तो आयशा बोलीं कितनी जल्दी लोग आलोचना करत हैं जौन उनका पता नाहीं है। मस्जिद मा लाश लावै के ताईं हमरे सबके आलोचना किहिन। दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने सुहैल बिन बैदला `मस्जिद के अलावा' नमाज नहीं पढ़ी।