Al Alim
Imam Tirmidzi : 3452
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَرَفَةَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ عَنْ أَبِي رَاشِدٍ الْحُبْرَانِيِّ قَالَ أَتَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ فَقُلْتُ لَهُ حَدِّثْنَا مِمَّا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَلْقَى إِلَيَّ صَحِيفَةً فَقَالَ هَذَا مَا كَتَبَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَنَظَرْتُ فَإِذَا فِيهَا إِنَّ أَبَا بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِي مَا أَقُولُ إِذَا أَصْبَحْتُ وَإِذَا أَمْسَيْتُ فَقَالَ يَا أَبَا بَكْرٍ قُلْ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ رَبَّ كُلِّ شَيْءٍ وَمَلِيكَهُ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ نَفْسِي وَمِنْ شَرِّ الشَّيْطَانِ وَشِرْكِهِ وَأَنْ أَقْتَرِفَ عَلَى نَفْسِي سُوءًا أَوْ أَجُرَّهُ إِلَى مُسْلِمٍ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ
हमसे कहिन है [अल हसन बिन अराफा] हमसे [इस्माइल बिन अय्यासी] से [मुहम्मद बिन जियाद] से [अबू रसीद अल हुबरानी] कहिन हैं; मैं [अब्दुल्लाह बिन अमर बिन अल आश] के पास आया तब मैंने उनसे कहा; पैगम्बर सल्लल्लाहु व सल्लम से जो सुना है उसके बारे में बताइये ! फिर एक चादर फेंक के कहिन; ई वही है जवन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु वअलेहि वसल्लम ने मोका लिखा है। अबू रसीद अल हुबरानी ने कहा; फिर हम ओका देखेन, पता चला कि सामग्री उ अबू बकर ऐश शिद्दीक रदलियाल्लाहू अन्हू कहिन; हे अल्लाह के रसूल, सुबह और दोपहर में क्या बोलता हूँ, सिखाओ ! तब उन्होंने कहा: 'हे अबू बकर कहो; अल्लाहुम्मा फथिरस समावति वाल अर्धी, 'अलीमल घैबी वासी स्याहादाह, ला इलाहा इल्ला अन्ता, रब्बा कुल्ली स्याई-इन वा मलिकाह, अ'उदज़ु बिका मिन स्यारी नफसीई, वा मैं स्यारी स्याई स्याई-इन वा मलिइकाह AN AQTARIFA 'ALAA NAFSII SUUAN AU AJURRAHU ILAA MUSLIM -हे अल्लाह, अदृश्य अऊर दृश्य के सर्वज्ञ, आकाश अऊर पृथ्वी के रचयिता, सब चीजन के स्वामी अऊर ओनके मालिक, मैं गवाही देत हउँ कि तुम्हारे अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, मैं अपने अऊर ओनके अऊर ओनके सबके बुराई से तोहरे से शरण लेत हउँ मुझसे बुरा करो या कि मैं एक मुसलमान को लाऊँ-। अबू ईसा कहिन; यह हदीस इस पंक्ति से हसन गरीब हदीस है।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 49, 60, 77, 418, 444, 497, 2024, 2183, 2437, 2775, 3477, 3561, 3572, 3584, 3721, 3954, 4032, 4536, 4887, 4975, 5770, 5902, 6309, 6555, 7620, 8040, 8042, 8472, 9137, 9301, 11047, 14180, 15617, 16541, 16851, 19585, 20261, 20354, 20479, 20678, 21908, 22046, 22756, 24444
Imam Bukhari : 981, 4261, 4405, 4477, 6831, 6876
Imam Abu Dawud : 4405, 4420, 4425
Imam Tirmidzi : 3314, 3452
Imam Darimi : 2573