Sujud sahwi: sujud dua kali sebelum atau setelah salam, ketika lupa rakaat shalat
Imam Darimi : 1459
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي ابْنُ الْمُسَيَّبِ وَأَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَعُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الظُّهْرِ أَوْ الْعَصْرِ فَسَلَّمَ فِي رَكْعَتَيْنِ مِنْ إِحْدَاهُمَا فَقَالَ لَهُ ذُو الشِّمَالَيْنِ بْنُ عَبْدِ عَمْرِو بْنِ نَضْلَةَ الْخُزَاعِيُّ وَهُوَ حَلِيفُ بَنِي زُهْرَةَ أَقُصِرَتْ أَمْ نَسِيتَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ أَنْسَ وَلَمْ تُقْصَرْ فَقَالَ ذُو الشِّمَالَيْنِ قَدْ كَانَ بَعْضُ ذَلِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَأَقْبَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى النَّاسِ فَقَالَ أَصَدَقَ ذُو الْيَدَيْنِ قَالُوا نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَتَمَّ الصَّلَاةَ وَلَمْ يُحَدِّثْنِي أَحَدٌ مِنْهُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَجَدَ سَجْدَتَيْنِ وَهُوَ جَالِسٌ فِي تِلْكَ الصَّلَاةِ وَذَلِكَ فِيمَا نُرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ مِنْ أَجْلِ أَنَّ النَّاسَ يَقَّنُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى اسْتَيْقَنَ
हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन सालिह] ने हमसे कहा है [अल लैट्स] ने हमसे कहा है [यूनुस] से [इब्न शिहाब] ने हमसे कहा है [इब्न अल मुसय्यब] अऊर [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] अऊर [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान] अऊर ['उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] से कि [अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान] ने कहा है कि [अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान] ने कहा है कि वसल्लम नमाज झुहुर या असर किहिन, फिर उ दुइनौ नमाज के बीच दूसर रकात का नमस्कार करत हैं। तब ज़ुसी स्यामलैन बिन अब्दु अमरू बिन नदल्लाह अल खुजाइ - बानी जुहरा के सहयोगी - ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, का नमाज सारांशित कीन गै रही या आप ही रहे जे ओका भूल गए रहे?' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं नहीं भूलता और नमाज भी छोटी नहीं होती'। तब डज़ुसी श्यिमलैन ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, आपने जो कहा, उसमें से कुछ तो हो गया है! ' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगन के ओर मुड़े अऊर कहिन: 'का दज़ुल यादैन सच कहत अहै?' उइ जवाब दिहिन, 'हाँ, अल्लाह के रसूल! ' रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब नमाज पूरी करै के लिए खड़ा होइ गें, अऊर ओनमा से एकौ ने मोका नाहीं बतावा कि उ समय रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम बैठे-बैठे दुइ बार सजदा किहिन। अऊर ई हमका देखावा गा मामला मा है। वल्लाहु अ'लम, काहे से कि लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का तब तक मना लिहिन हैं जब तक कि उ आत्मविश्वास महसूस न करै।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 1568, 1587, 1656, 1661, 1669, 3385, 3389, 3420, 3786, 3827, 4016, 4118, 4186, 4199, 7070, 8649, 9099, 9401, 9545, 9551, 9660, 10351, 10467, 11264, 11356, 11367, 11403, 16308, 16310, 19022, 19111, 21853, 21854, 21855
Imam Bukhari : 386, 389, 674, 1148, 1149, 1150, 1151, 1152, 1153, 1154, 1155, 1156, 3043, 5591, 6708, 6709
Imam Muslim : 883, 884, 885, 886, 887, 888, 889, 890, 891, 892, 893, 894, 895, 896, 897, 898, 899
Imam Abu Dawud : 857, 858, 859, 860, 861, 862, 863, 864, 865, 866, 867, 868, 869, 870, 871, 872, 873, 874, 875
Imam Tirmidzi : 356, 357, 358, 359, 360, 361, 362, 363, 364, 365
Imam Nasa'i : 1207, 1208, 1209, 1210, 1211, 1212, 1213, 1214, 1215, 1216, 1217, 1218, 1219, 1220, 1221, 1222, 1223, 1224, 1225, 1226, 1227, 1228, 1229, 1230, 1231, 1232, 1233, 1234, 1235, 1236, 1237, 1238, 1239, 1240, 1241, 1242, 1243, 1244
Imam Ibnu Majah : 1193, 1194, 1195, 1196, 1197, 1198, 1199, 1200, 1201, 1202, 1203, 1204, 1205, 1206, 1207, 1208, 1209
Imam Malik : 198, 199, 200, 201, 202, 203, 208
Imam Darimi : 1456, 1457, 1458, 1459, 1460, 1461, 1462, 1463