Tutuplah kepalanya dengan kain dan dan tutuplah kakinya dengan idzkhir (rumput-rumputan berbau harum)
Imam Bukhari : 3741
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ خَبَّابِ بْنِ الْأَرَتِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَهَاجَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَبْتَغِي وَجْهَ اللَّهِ فَوَجَبَ أَجْرُنَا عَلَى اللَّهِ وَمِنَّا مَنْ مَضَى أَوْ ذَهَبَ لَمْ يَأْكُلْ مِنْ أَجْرِهِ شَيْئًا كَانَ مِنْهُمْ مُصْعَبُ بْنُ عُمَيْرٍ قُتِلَ يَوْمَ أُحُدٍ لَمْ يَتْرُكْ إِلَّا نَمِرَةً كُنَّا إِذَا غَطَّيْنَا بِهَا رَأْسَهُ خَرَجَتْ رِجْلَاهُ وَإِذَا غُطِّيَ بِهَا رِجْلَاهُ خَرَجَ رَأْسُهُ فَقَالَ لَنَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَطُّوا بِهَا رَأْسَهُ وَاجْعَلُوا عَلَى رِجْلِهِ الْإِذْخِرَ أَوْ قَالَ أَلْقُوا عَلَى رِجْلِهِ مِنْ الْإِذْخِرِ وَمِنَّا مَنْ قَدْ أَيْنَعَتْ لَهُ ثَمَرَتُهُ فَهُوَ يَهْدِبُهَا
हमसे कहिन है [अहमद बिन यूनुस] हमसे कहिन है [जुहैर] हमसे [अल अमासी] से [स्याक] से [खब्बाब बिन अल आर्ट] रादलियाहु अन्हू से कहिन है, उ कहिन, 'हम अल्लाह के आशीर्वाद के उम्मीद मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के साथे प्रवास किहिन, तब अल्लाह हमरे बीच इनाम दिहिन, अऊर हमरे बीच उ लोग नाहीं रहे जे मरे रहे जरा भी -सांसारिक- इनाम, ओनमा से मुसअब बिन उमैर रहा जे उहुद के लड़ाई मा मारा गा रहा, अऊर हमका कपड़ा के टुकड़ा के अलावा ओका कफन करै के लिए कुछौ नाहीं मिला, अगर हम ओनके सिर का ढँक देत रहेन, तौ ओनके गोड़ उजागर होत रहे अऊर अगर हम ओनके गोड़न का ढँकत रहेन, तौ ओनके सिर उजागर होत रहा। त पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'उनके सिर का कपड़ा से ढँकौ अऊर उनके गोड़न का इदज़खिर - सुगंधित घास - से ढकौ,' या उ कहिन: 'इद्ज़खिर से उनके गोड़न का ढँकौ'। हमरे बीच से एक मनई भी रहा जेकरे पास पका फल रहा अऊर उ ओका तोड़िस'।