Kisah 'Abdurrahman bin 'Auf RA menangis saat dihidangkan makanan karena teringat pengorbanan Mus'ab bin 'Umair & Hamzah RA serta khawatir balasan kebaikannya disegerakan di dunia
Imam Bukhari : 3739
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِيهِ إِبْرَاهِيمَ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَوْفٍأُتِيَ بِطَعَامٍ وَكَانَ صَائِمًا فَقَالَ قُتِلَ مُصْعَبُ بْنُ عُمَيْرٍ وَهُوَ خَيْرٌ مِنِّي كُفِّنَ فِي بُرْدَةٍ إِنْ غُطِّيَ رَأْسُهُ بَدَتْ رِجْلَاهُ وَإِنْ غُطِّيَ رِجْلَاهُ بَدَا رَأْسُهُ وَأُرَاهُ قَالَ وَقُتِلَ حَمْزَةُ وَهُوَ خَيْرٌ مِنِّي ثُمَّ بُسِطَ لَنَا مِنْ الدُّنْيَا مَا بُسِطَ أَوْ قَالَ أُعْطِينَا مِنْ الدُّنْيَا مَا أُعْطِينَا وَقَدْ خَشِينَا أَنْ تَكُونَ حَسَنَاتُنَا عُجِّلَتْ لَنَا ثُمَّ جَعَلَ يَبْكِي حَتَّى تَرَكَ الطَّعَامَ
हमसे कहिस है ['अब्दन] हमसे कहिस है [अब्दुल्ला] हमसे [स्युबाह] [सद बिन इब्राहिम] से अपने पिता [इब्राहिम] से कहिस है कि जब [अब्दुर्रहमान बिन औफ] उपवास करत रहें तौ ओका एक बार भोजन दीन गा रहा, तब उ कहिन, 'मुहसब बिन उमरी गिर गा है, भले ही उ एक बुरदा मा बंधा रहा, कपड़ा, अगर ओकर माथा ढँका रहा तौ ओकर गोड़ उजागर होइ जात, अऊर अगर ओकर गोड़ ढँका रहा तौ ओकर माथा उजागर होइ। -अऊर जइसे कि हमका याद है कि उ कहिन- हमजाह मर गए भले ही उ हमसे अच्छा रहे, ओकरे बाद -दुनिया के सुख- हमरे लिए खुल गए -या उ कहिन-, हमका दुनिया के -सुख- वइसने दिहिन हैं जइसे कि हमका दिहिन हैं, हमका डर है कि ई हमार -इनाम- दयालुता है जवन पहिले आवत है,' फिर उ चिल्लाए अऊर पकवान छोड़ दिहिन'।