Larangan meminang, menikah atau menikahkan ketika sedang berihram
Imam Nasa'i : 2793
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ أَنَّ أَبَانَ بْنَ عُثْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَنْكِحُ الْمُحْرِمُ وَلَا يَخْطُبُ وَلَا يُنْكِحُ
हमका [कुतैबा] [मलिक] से [नफी'] से [नुबैह बिन वहब] से बतावा गा है कि [अबन बिन उस्मान] कहिन; हम एक बार [उस्मान बिन अफ्फान] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो लोग इहराम मा हैं, ओनका शादी, प्रपोज अऊर शादी करै के इजाजत नाहीं है'।