Larangan meminang, menikah atau menikahkan ketika sedang berihram
Imam Abu Dawud : 1569
حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ عَنْ مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ أَخِي بَنِي عَبْدِ الدَّارِأَنَّ عُمَرَ بْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ أَرْسَلَ إِلَى أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ يَسْأَلُهُ وَأَبَانُ يَوْمَئِذٍ أَمِيرُ الْحَاجِّ وَهُمَا مُحْرِمَانِ إِنِّي أَرَدْتُ أَنْ أُنْكِحَ طَلْحَةَ بْنَ عُمَرَ ابْنَةَ شَيْبَةَ بْنِ جُبَيْرٍ فَأَرَدْتُ أَنْ تَحْضُرَ ذَلِكَ فَأَنْكَرَ ذَلِكَ عَلَيْهِ أَبَانُ وَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ أَبِي عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَنْكِحُ الْمُحْرِمُ وَلَا يُنْكِحُحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ جَعْفَرٍ حَدَّثَهُمْ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ مَطَرٍ ويَعْلَى بْنِ حَكِيمٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ عُثْمَانَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَكَرَ مِثْلَهُ زَادَ وَلَا يَخْطُبُ
हमने [अल का'नाबी] से [मलिक] से [नफी] से [नुबैह बिन वहब] से बानी अब्दुद्दार के भाई से कहा है कि उमर बिन उबैदुल्ला ने ओनका [अबान बिन उथमान बिन 'अफ्फान] के पास भेजा रहा कि उ ओसे पूछे, अऊर उ समय अबान हज के नेता रहे, अऊर उ दुइनौ इन्राम रहे। उ कहिन; मैं स्याबाह बिन जुबैर के बिटिया के शादी थलहा बिन उमर से करय चाहत हउँ, मैं चाहत हउँ कि तुम वहिमा शामिल होइ जा। तब अबन ई बात से इनकार किहिन अऊर कहिन; दरअसल, हम अपने पिता, अर्थात् [उस्मान बिन अफ्फान] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु वअलेहि वसल्लम ने कहा: 'जो व्यक्ति इहराम में है, वह शादी नहीं कर सकत है और शादी नहीं कर सकत है'। हमसे [कुतैबा बिन सईद] कहिन है कि [मुहम्मद बिन जाफर] ने उनसे कहा है, हमसे [सैद] [मथार] से अऊर [य'ला बिन हकीम] से [नफी'] से [नुबैह बिन वहब] से [अबान बिन उथमान] से [उथमान] से कहा है कि अल्लाह के रसूल अल्लाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाम के तरह ..... हदीस, अऊर शब्दन का जोड़िन: अऊर प्रस्ताव रखब जायज नाहीं है।