Turunnya ayat faraidh berkenaan dengan pertanyaan Jabir bin Abdullah tentang warisan kalalah saat ia sakit
Imam Bukhari : 187
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ قَالَ سَمِعْتُ جَابِرًا يَقُولُجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعُودُنِي وَأَنَا مَرِيضٌ لَا أَعْقِلُ فَتَوَضَّأَ وَصَبَّ عَلَيَّ مِنْ وَضُوئِهِ فَعَقَلْتُ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لِمَنْ الْمِيرَاثُ إِنَّمَا يَرِثُنِي كَلَالَةٌ فَنَزَلَتْ آيَةُ الْفَرَائِضِ
हमसे [अबू अल वलिद] बतावा गा है, हमसे [स्युबाह] बतावा गा है [मुहम्मद बिन अल मुनकादिर] से कहिन, 'मैंने [जाबिर] का कहत सुना, 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मैं बीमार रहेंव तब मुझसे मिले आए रहें जेकरे परिणामस्वरूप मैं बेहोश होइ गवा रहेंव। पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब वजू लिहिन अऊर अपने वजू से बचे पानी का तब तक डारि दिहिन जब तक कि हमका एहसास नाइ भवा। तब हमने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, ई विरासत केकरे लिए है? काहे से कि हमका कलालाह विरासत मा नाहीं मिलत है -बच्चा नाहीं हैं-? ' तब विरासत के बारे में श्लोक उतरा'।