Tidak membatalkan wudhu: Tidur dalam posisi duduk yang tetap dan tidak berubah
Imam Tirmidzi : 73
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنَامُونَ ثُمَّ يَقُومُونَ فَيُصَلُّونَ وَلَا يَتَوَضَّئُونَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ و سَمِعْت صَالِحَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْمُبَارَكِ عَمَّنْ نَامَ قَاعِدًا مُعْتَمِدًا فَقَالَ لَا وُضُوءَ عَلَيْهِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَوَى حَدِيثَ ابْنِ عَبَّاسٍ سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَوْلَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ أَبَا الْعَالِيَةِ وَلَمْ يَرْفَعْهُ وَاخْتَلَفَ الْعُلَمَاءُ فِي الْوُضُوءِ مِنْ النَّوْمِ فَرَأَى أَكْثَرُهُمْ أَنْ لَا يَجِبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ إِذَا نَامَ قَاعِدًا أَوْ قَائِمًا حَتَّى يَنَامَ مُضْطَجِعًا وَبِهِ يَقُولُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَأَحْمَدُ قَالَ بَعْضُهُمْ إِذَا نَامَ حَتَّى غُلِبَ عَلَى عَقْلِهِ وَجَبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ وَبِهِ يَقُولُ إِسْحَقُ و قَالَ الشَّافِعِيُّ مَنْ نَامَ قَاعِدًا فَرَأَى رُؤْيَا أَوْ زَالَتْ مَقْعَدَتُهُ لِوَسَنِ النَّوْمِ فَعَلَيْهِ الْوُضُوءُ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे [यह्या बिन सैद] से [स्यूबाह] से [कतदाह] से [अनस बिन मलिक] कहिन है; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सोए, फिर जाग गए और फिर से बिना वजू किये नमाज पढ़ी'। अबू ईसा कहिन; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक है।' उ कहिन; 'मैंने सालिह बिन अब्दुल्ला का कहते सुना; 'मैंने अब्दुल्ला इब्नुल मुबारक से जानबूझकर बैठते हुए सोने वाले लोगन के कानून के बारे में पूछा, उन्होंने जवाब दिया, 'उनका वजू नहीं लेना है'। अबू ईसा कहिन; 'सैद बिन अरुबाह ने इब्न अब्बास से कतादह से इब्न अब्बास के हदीस सुनाई। उइ वहिमा अबुल आलिया के नाम नाहीं लिहिन अऊर न ही ओनके बारे मा लिहिन। नींद के कारण वजू के बारे मा विद्वानन के आपन राय अलग-अलग है, कुछ विद्वानन का तर्क है कि अगर केहू बैठे या खड़े होके सोवत है, तब तक वॉजू लेब अनिवार्य नाहीं है, जब तक कि कोई लेट के सो न जाय। ई राय एट्स त्सौरी, इब्नुल मुबारक अऊर अहमद द्वारा लीन गै रही। लेकिन ओनमा से कुछ लोग कहिन; 'अगर ऊ तब तक सोवत है जब तक कि ओकर दिमाग काम नाहीं करत है, तौ ओका वजू करै का परी।' ई राय इशाक ने लीन रहा। इमाम अश स्याफी ने कहा; 'अगर कौनो मनई तब तक सोवत है जब तक कि ऊ सपना नाहीं देखत है, या जब तक कि ऊ नींद के कारण ओकर सीट नाइ बदल जात है, तब तक ओका वजू करै का चाही।'