इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Tidak membatalkan wudhu: beliau berbaring dan tidur hingga mendengkur. Kemudian adzan shalat telah tiba, beliau lalu pergi dan shalat tanpa berwudlu lagi

Imam Bukhari : 135

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو قَالَ أَخْبَرَنِي كُرَيْبٌ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَامَ حَتَّى نَفَخَ ثُمَّ صَلَّى وَرُبَّمَا قَالَ اضْطَجَعَ حَتَّى نَفَخَ ثُمَّ قَامَ فَصَلَّى ثُمَّ حَدَّثَنَا بِهِ سُفْيَانُ مَرَّةً بَعْدَ مَرَّةٍ عَنْ عَمْرٍو عَنْ كُرَيْبٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍقَالَ بِتُّ عِنْدَ خَالَتِي مَيْمُونَةَ لَيْلَةً فَقَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ اللَّيْلِ فَلَمَّا كَانَ فِي بَعْضِ اللَّيْلِ قَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَتَوَضَّأَ مِنْ شَنٍّ مُعَلَّقٍ وُضُوءًا خَفِيفًا يُخَفِّفُهُ عَمْرٌو وَيُقَلِّلُهُ وَقَامَ يُصَلِّي فَتَوَضَّأْتُ نَحْوًا مِمَّا تَوَضَّأَ ثُمَّ جِئْتُ فَقُمْتُ عَنْ يَسَارِهِ وَرُبَّمَا قَالَ سُفْيَانُ عَنْ شِمَالِهِ فَحَوَّلَنِي فَجَعَلَنِي عَنْ يَمِينِهِ ثُمَّ صَلَّى مَا شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ اضْطَجَعَ فَنَامَ حَتَّى نَفَخَ ثُمَّ أَتَاهُ الْمُنَادِي فَآذَنَهُ بِالصَّلَاةِ فَقَامَ مَعَهُ إِلَى الصَّلَاةِ فَصَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْقُلْنَا لِعَمْرٍو إِنَّ نَاسًا يَقُولُونَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَنَامُ عَيْنُهُ وَلَا يَنَامُ قَلْبُهُ قَالَ عَمْرٌو سَمِعْتُ عُبَيْدَ بْنَ عُمَيْرٍ يَقُولُ رُؤْيَا الْأَنْبِيَاءِ وَحْيٌ ثُمَّ قَرَأَ{ إِنِّي أَرَى فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ }

हमसे कहिन [अली बिन अब्दुल्ला] कहिन, हमसे कहिन [सुफयान] से [अमरू] कहिन, हमका [कुरैब] से [इब्न अब्बास] बताइन, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब तक सोए रहे जब तक कि उ खर्राटे नाहीं लिहिन फिर जाग गए अऊर नमाज पढ़िन। या कहा कि 'नबी लेट गए और खर्राटे लिहिन, फिर उ खड़ा होइके नमाज पढ़िन।' फिर [सुफयान] हमका क्रमशः हदीस सुनाइन, [अमरू] से [कुरैब] से [इब्न अब्बास] से उ कहिन, 'एक रात मैं अपनी चाची, मैमुना, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के घरे रुका अऊर फिर शाम के नमाज पढ़िन। जब तक कि एक रात, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम जाग गए अऊर हल्के वजू के साथ एक छोटे से बर्तन से वजू करिन, वहिके बाद उ खड़ा होइके नमाज पढ़िन। तब मैं वजू के लिए उपयोग कीन जाय वाले बर्तन से वजू लेवे मा शामिल होइ गय, फिर मैं उनके पास गय अऊर उनके बाईं ओर प्रार्थना करै मा शामिल होइ गय -सुफयान ने भी बाईं ओर का जिक्र किहिन-, फिर उ मोका अपने दाईं ओर ले गें। यहिके बाद उ आपन इच्छा के अनुसार प्रार्थना किहिन, फिर उ लेट गए अऊर तब तक सोए रहे जब तक कि उ खर्राटे नाहीं लेत रहे। फिर एक फोन करै वाला सूचित करै आवा कि नमाज का समय आ गवा है, उ उनके साथे गें अऊर फिर से बिना वजू किहे नमाज पढ़िन'। हम तब अमरू से कहेन, 'लोग कहत हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आँखी सोवत हैं, लेकिन ओकरे दिल मा नाहीं'। अमरू तब कहिन, 'मैंने एक बार उबैद बिन उमैर का कहते सुना रहा, 'नबियन के सपने रहस्योद्घाटन हैं'। फिर उ पढ़िन: '-वास्तव मा हम सपना देखेन कि हम तोहका वध करब..- ' -प्रश्न। ऐश शफत: 102-।

Hadith Corroboration :


Imam Ahmad : 2087
Imam Bukhari : 135, 657, 684, 812
Imam Muslim : 1278