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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अबू दाऊद : 2138

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ نَجْدَةَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ ابْنِ ثَوْبَانَ عَنْ أَبِيهِ يَرُدُّ إِلَى مَكْحُولٍ إِلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غُنْمٍ الْأَشْعَرِيِّ أَنَّ أَبَا مَالِكٍ الْأَشْعَرِيَّ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ فَصَلَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَمَاتَ أَوْ قُتِلَ فَهُوَ شَهِيدٌ أَوْ وَقَصَهُ فَرَسُهُ أَوْ بَعِيرُهُ أَوْ لَدَغَتْهُ هَامَّةٌ أَوْ مَاتَ عَلَى فِرَاشِهِ أَوْ بِأَيِّ حَتْفٍ شَاءَ اللَّهُ فَإِنَّهُ شَهِيدٌ وَإِنَّ لَهُ الْجَنَّةَ

हमसे [अब्दुल वहाब बिन नजदा] ने कहा है, हमसे [बकियाह बिन अल वालिद] ने कहा है, [इब्न त्सुबान] से [अपने पिता] से, उन्होंने इसे [मखुल] से, [अब्दुर्रहमान बिन घुनम अल असीरी] से कहा है कि [अबू मलिक], अल असीरी ने कहा; मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना; "जो कोई अल्लाह के रास्ते में फैसला करे और मर जाए, या मारा जाए, तो वह शहीद है, या उसका घोड़ा या ऊँट उसकी गर्दन तोड़ दे, या उसे बिच्छू काट ले, या वह अपने बिस्तर पर मर जाए, या जिस भी मौत से वह चाहे, वह शहीद है, और उसके लिए जन्नत है।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 556, 1542, 1552, 1565, 2643, 6236, 6524, 6531, 6535, 6628, 6662, 6718, 6735, 6758, 6787, 7947
इमाम बुखारी : 2300
इमाम मुस्लिम : 201, 202
इमाम अबू दाऊद : 2138
इमाम तिर्मिदज़ी : 1338, 1339, 1340, 1341
इमाम नसाई : 4016, 4017, 4018, 4019, 4020, 4021, 4022, 4023, 4024, 4025, 4026, 4027, 4028
इमाम इब्नु माजा : 2570, 2571, 2572