Perintah Rasulullah untuk meluruskan shaf supaya tidak menimbulkan permusuhan antara satu dengan lainnya
Imam Abu Dawud : 567حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ بْنَ بَشِيرٍ يَقُولُكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسَوِّينَا فِي الصُّفُوفِ كَمَا يُقَوَّمُ الْقِدْحُ حَتَّى إِذَا ظَنَّ أَنْ قَدْ أَخَذْنَا ذَلِكَ عَنْهُ وَفَقِهْنَا أَقْبَلَ ذَاتَ يَوْمٍ بِوَجْهِهِ إِذَا رَجُلٌ مُنْتَبِذٌ بِصَدْرِهِ فَقَالَ لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُمْ أَوْ لَيُخَالِفَنَّ اللَّهُ بَيْنَ وُجُوهِكُمْ
[मूसा बिन इस्माइल] हमरा [हम्मद] के [सिमक बिन हरब] स बतेलनि जे कहलनि: हम [अन-नुमान बिन बशीर] के कहैत सुनलहुं: पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमर सबहक पंक्ति के सीधा करैत छलाह, जेना कि ओ तीर सीधा करैत छथि, जाबत तक हुनका लागल जे हम हुनकर आज्ञा पूरा क लेलहुं आ ओकरा ठीक स बुझि गेलाह, अचानक एक दिन ओ अपन मुँह घुमा लेलनि हमरा सभक दिस आ देखलक जे एखनो कियो छाती बाहर निकालि रहल अछि, तें ओ कहलनि: 'अहाँ सभ पंक्ति सभ सोझ करू, नहि त' - जँ नहि करब त' - तखन अल्लाह अहाँक चेहरा बदलि लेताह'.