हदीस
Al Hakim
Imam Abu Dawud : 4518حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ عِكْرِمَةَأَنَّ نَفَرًا مِنْ أَهْلِ الْعِرَاقِ قَالُوا يَا ابْنَ عَبَّاسٍ كَيْفَ تَرَى فِي هَذِهِ الْآيَةِ الَّتِي أُمِرْنَا فِيهَا بِمَا أُمِرْنَا وَلَا يَعْمَلُ بِهَا أَحَدٌ قَوْلُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لِيَسْتَأْذِنْكُمْ الَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ وَالَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا الْحُلُمَ مِنْكُمْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ مِنْ قَبْلِ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُمْ مِنْ الظَّهِيرَةِ وَمِنْ بَعْدِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ ثَلَاثُ عَوْرَاتٍ لَكُمْ لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌ بَعْدَهُنَّ طَوَّافُونَ عَلَيْكُمْ }قَرَأَ الْقَعْنَبِيُّ إِلَى{ عَلِيمٌ حَكِيمٌ }قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ إِنَّ اللَّهَ حَلِيمٌ رَحِيمٌ بِالْمُؤْمِنِينَ يُحِبُّ السَّتْرَ وَكَانَ النَّاسُ لَيْسَ لِبُيُوتِهِمْ سُتُورٌ وَلَا حِجَالٌ فَرُبَّمَا دَخَلَ الْخَادِمُ أَوْ الْوَلَدُ أَوْ يَتِيمَةُ الرَّجُلِ وَالرَّجُلُ عَلَى أَهْلِهِ فَأَمَرَهُمْ اللَّهُ بِالِاسْتِئْذَانِ فِي تِلْكَ الْعَوْرَاتِ فَجَاءَهُمْ اللَّهُ بِالسُّتُورِ وَالْخَيْرِ فَلَمْ أَرَ أَحَدًا يَعْمَلُ بِذَلِكَ بَعْدُقَالَ أَبُو دَاوُد حَدِيثُ عُبَيْدِ اللَّهِ وَعَطَاءٍ يُفْسِدُ هَذَا الْحَدِيثَ
हमनी के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] कहले बाड़े, हमनी के [अब्दुल अजीज] -मतलब अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद- [अमरू बिन अबू अमरू] से [इकरीमा] से बतावल गईल बा कि इराक के लोग से कुछ लोग रहे जवन कहले रहे कि, 'हे [इब्न अब्बास], रउआ एह आयत के बारे में का सोचत बानी; हमनी के आदेश दिहल गईल बा कि जवन बा ओकरा के अभ्यास करीं, लेकिन केहु एकर अभ्यास नईखे कईल चाहत? इहे अल्लाह के वचन ह: -हे विश्वास करे वाला लोग, गुलाम - मरद मेहरारू - जवन तोहनी में बा, आ जे यौवन तक ना पहुँचल बा, उ रउआ से तीन बेर अनुमति मांगे - एक दिन में - यानी: सुबह के नमाज से पहिले, जब आप दुपहरिया में आपन बाहरी कपड़ा उतारब आ ईशा के नमाज के बाद। -उहे- रउरा खातिर तीन भाग बा। ओह -तीन बेर-... के अलावा तोहरा पर ना -ना- ओह लोग पर पाप बा।' अल -का'नबी एकरा के तब तक पढ़ले जब तक कि उनकर वचन-: '...सब जानकार, सर्वबुद्धिमान-' -Qs. अन नूर: 58- इब्न अब्बास कहले, 'वास्तव में अल्लाह कोमल हवें आ मुसलमानन पर दया करेलें। अल्लाह के दोसरा के पानी ढंकल -सिफत- पसंद बा। एही बीच ओह घरी लोग के घर में कवरिंग भा हिजाब ना रहे, एहसे जब पति अपना पत्नी के संगे सेक्स करत रहले त कवनो आदमी के नौकर, चाहे बच्चा, चाहे अनाथ महिला के घर में घुसल संभव रहे। त अल्लाह ओह लोग के आदेश दिहलन कि एह समय पर अनुमति माँगे. अल्लाह हिजाब अवुरी दयालुता के शरीयत लेके उनुका लगे आईल रहले, लेकिन हमरा कबो अयीसन करेवाला केहु नईखे मिलल'। अबू दाऊद कहले कि उबैदुल्लाह अवुरी अथा के हदीस ए हदीस के नष्ट क देले।