Hadith Representative
Tamu berhak mendapat jamuan, jika tidak diberi, ambil sebatas hak
Imam Bukhari : 2281حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ قَالَقُلْنَا لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكَ تَبْعَثُنَا فَنَنْزِلُ بِقَوْمٍ لَا يَقْرُونَا فَمَا تَرَى فِيهِ فَقَالَ لَنَا إِنْ نَزَلْتُمْ بِقَوْمٍ فَأُمِرَ لَكُمْ بِمَا يَنْبَغِي لِلضَّيْفِ فَاقْبَلُوا فَإِنْ لَمْ يَفْعَلُوا فَخُذُوا مِنْهُمْ حَقَّ الضَّيْفِ
हमसे कहिस है [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] हमसे कहिस है [अल लैट्स] कहिन, हमसे कहिन है [यजीद] से [अबू अल खैर] से ['उकबा बिन अमीर] कहिन; हमने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा: अगर आप हमका यात्रा पर भेजिन अऊर हम एक लोगन - गाँव - पर रुकेन लेकिन उ लोग हमका सेवा नाहीं किहिन - हमका मेहमान अधिकार देत हैं - त आप ई मामला के बारे मा का सोचब?' त उ कहिन: 'हमरे लिए, अगर आप एक लोगन के पास रुकत हई, तौ आपके लिए आदेश है कि आपका मेहमान के रूप मा जवन मिलै का चाही, उ पावै, फिर ओनसे पूछौ। पूर न करिहैं तौ मेहमान के हक समझि के ओनसे लै लीन जाय।'