हदीस
Dua rakaat yang tidak pernah ditinggalkan Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam (sebelum shubuh & setelah ashar)
Imam Nasa'i : 573أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْأَسْوَدِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْصَلَاتَانِ مَا تَرَكَهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَيْتِي سِرًّا وَلَا عَلَانِيَةً رَكْعَتَانِ قَبْلَ الْفَجْرِ وَرَكْعَتَانِ بَعْدَ الْعَصْرِ
हमनी के [अली बिन हुजर] के जानकारी देले बा उ कहले कि; हमरा के [अली बिन मुशीर] के [अबू इशक] से [अब्दुररहमान बिन अल असवद] से [उनकर पिता] से [आइशा] से जानकारी देले बाड़े रदलियाल्लाहुअनहा कहले; 'दू गो नमाज बा जवन अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम कबो ना छोड़ले, चाहे ऊ गुप्त रूप से होखे भा खुलेआम, जवन कि फजर - सुबुह - से पहिले के दू गो रकाअत नमाज आ अस्र के बाद दू गो रकाअत नमाज'।