Hadith Representative
Beliau mengajari khuthbah shalat dan khuthbah hajat
Imam Bukhari : 1127حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الصَّمَدِ عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حُصَيْنُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُقَالَ كُنَّا نَقُولُ التَّحِيَّةُ فِي الصَّلَاةِ وَنُسَمِّي وَيُسَلِّمُ بَعْضُنَا عَلَى بَعْضٍ فَسَمِعَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ قُولُوا التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ فَإِنَّكُمْ إِذَا فَعَلْتُمْ ذَلِكَ فَقَدْ سَلَّمْتُمْ عَلَى كُلِّ عَبْدٍ لِلَّهِ صَالِحٍ فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ
हमसे कहिस है [अमरू बिन ईसा] हमसे कहिस है [अबू अब्दुश शमाद अब्दुल अजीज बिन अब्दुश शमाद] हमसे [हुशैन बिन अब्दुर्रहमान] [अबू वैल] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद रदलियाअल्लाहू अनहू] से कहिस है; 'हम एक बार प्रार्थना मा अत-तहियात पढ़े रहेन, जेहिमा हम नाम लइके कुछ लोगन का नमस्कार किहेन। यह बात तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तब तक सुनी जब तक कि अंत में उन्होंने कहा: 'पढ़ो: 'अत्तहियातु लिल्लाहि वाशशालावातु वथथैयिबात। असलाम अलैका आयुहन्नाबियु वा रहमतुल्लोही वा बारातौह। असलाम अलैना वा अला इबादिल्लाहिश शाओलिहिन। अश्हादु अल्लाह इलाहा इल्लाह व अस्यहादु अन्ना मुहम्मदन 'अब्दुहु व रसूलुह' ' -सब सम्मान अकेले अल्लाह का है, साथ ही साथ सब महिमा अऊर अच्छाई भी। हे पैगम्बर, आप पर समृद्धि अऊर उनकी दया अऊर आशीर्वाद हो। अऊर हमरे अऊर अल्लाह के धर्मी सेवकन का भी समृद्धि प्रदान कीन जाय। मैं गवाही देत हउँ कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है अऊर मैं गवाही देत हउँ कि मुहम्मद उनकर सेवक अऊर दूत हैं'-। काहे से कि अगर तुम अइसन करत हौ, तौ एकर मतलब है कि तुम आसमान अऊर धरती मा अल्लाह के सब धर्मी सेवकन का नमस्ते कहे हौ'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 2533, 3381, 3683, 3725, 3726, 3739, 3804, 3813, 3945, 3963, 3974, 4078, 4151, 4190
Imam Bukhari : 1127, 5794, 6833
Imam Muslim : 610
Imam Abu Dawud : 826, 828
Imam Tirmidzi : 266, 267, 1023
Imam Nasa'i : 1150, 1151, 1152, 1153, 1154, 1155, 1156, 1157, 1158, 1160, 1161, 1162, 1260, 1262, 1264
Imam Ibnu Majah : 890, 892, 1882
Imam Malik : 189, 190, 191, 192
Imam Darimi : 1307