Beliau mengajari khuthbah shalat dan khuthbah hajat
Imam Bukhari : 5794
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا سَيْفٌ قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يَقُولُ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَخْبَرَةَ أَبُو مَعْمَرٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ مَسْعُودٍ يَقُولُعَلَّمَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَفِّي بَيْنَ كَفَّيْهِ التَّشَهُّدَ كَمَا يُعَلِّمُنِي السُّورَةَ مِنْ الْقُرْآنِ التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَهُوَ بَيْنَ ظَهْرَانَيْنَا فَلَمَّا قُبِضَ قُلْنَا السَّلَامُ يَعْنِي عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिन [अबू नुएम] हमसे कहिन हैं [सैफ] उ कहिन; हम [मुजाहिद] का कहत सुने रहेन; मुझसे [अब्दुल्ला बिन सहबराह अबू मामर] बताइस है कि उ कहिन; हम [इब्न मसूद] का कहत सुने रहेन; 'अल्लाह के रसूल शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार मुझे तस्याहुद सिखाया - अपनी हथेलियाँ फैलाते हुए - जैसा कि उ मुझे कुरान के अक्षर सिखाए, अर्थात्; 'अत-तहिय्यतुत लिल्लाहि वाश-शलवातु वाथ-थय्यिबातु, असलामु अलैका अय्युहान-नबियु वा रहमतुल्लाहि वा बराकतुह, असलामु अलैना वा अला इबाअदिल्लाहलाहिलाअलाहलाअलाहलाअलाहा इलाल्लाह वा अस्यहादु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु वा रसूलुह - सम्मान, दया अऊर अच्छाई केवल अल्लाह के लिए। सुरक्षा, दया और आशीर्वाद आप पर बना रहे, हे पैगम्बर अल्लाह के धर्मी सेवकों के साथ भी मुक्ति मिले। मैं गवाही देत हउँ कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो प्राणी नाहीं है, अऊर मुहम्मद ओकर सेवक अऊर दूत हैं। यानी जब उ हमरे साथ जिंदा रहे, लेकिन जब उ मर गए, तब हमने कहा; 'अस्सलाम का मतलब है पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 2533, 2742, 3381, 3439, 3551, 3683, 3724, 3725, 3726, 3739, 3804, 3813, 3858, 3892, 3945, 3963, 3974, 4078, 4151, 4190
Imam Bukhari : 788, 791, 1127, 5762, 5794, 5853, 6833
Imam Muslim : 601, 609, 610, 611
Imam Abu Dawud : 825, 826, 828
Imam Tirmidzi : 266, 1023
Imam Nasa'i : 1150, 1151, 1152, 1153, 1154, 1155, 1156, 1157, 1158, 1160, 1162, 1260, 1261, 1262, 1264, 1281
Imam Ibnu Majah : 889, 890, 892, 1882
Imam Malik : 189, 190, 191, 192
Imam Darimi : 1306, 1307