Hadith Representative
Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam sujud di atas air dan lumpur hingga tampak sisa tanah becek pada dahi beliau
Imam Tirmidzi : 250حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ بُنْدَارٌ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ حَدَّثَنَا فُلَيْحُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنِي عَبَّاسُ بْنُ سَهْلٍ عَنْ أَبِي حُمَيْدٍ السَّاعِدِيِّأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا سَجَدَ أَمْكَنَ أَنْفَهُ وَجَبْهَتَهُ مِنْ الْأَرْضِ وَنَحَّى يَدَيْهِ عَنْ جَنْبَيْهِ وَوَضَعَ كَفَّيْهِ حَذْوَ مَنْكِبَيْهِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَوَائِلِ بْنِ حُجْرٍ وَأَبِي سَعِيدٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي حُمَيْدٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنْ يَسْجُدَ الرَّجُلُ عَلَى جَبْهَتِهِ وَأَنْفِهِ فَإِنْ سَجَدَ عَلَى جَبْهَتِهِ دُونَ أَنْفِهِ فَقَدْ قَالَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ يُجْزِئُهُ وَقَالَ غَيْرُهُمْ لَا يُجْزِئُهُ حَتَّى يَسْجُدَ عَلَى الْجَبْهَةِ وَالْأَنْفِ
[मुहम्मद बिन बस्स्यार बंडर] कहलनि; [अबू अमीर अल अकदी] कहलनि; [फुलैह बिन सुलेमान] कहलनि; [अब्बास बिन सहल] [अबू हुमैद अस सईदी] स कहलनि; 'सजदा करबा काल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन नाक आ कपार केँ जमीन पर दबा देलनि, अपन दुनू हाथ केँ कात सँ दूर क' देलनि, आ अपन दुनू हथेली केँ अपन दुनू कान्हक समानांतर राखि देलनि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न अब्बास, व`इल बिन हुजर आ अबू सईद सँ सेहो एकटा रिवायत अछि' | अबू ईसा कहलनि; अबू हुमैद के हदीस हसन सहीह छै। विद्वान सब एहि हदीस के अभ्यास करैत छथि, अर्थात व्यक्ति के नाक आ कपार के स्पर्श करबाक चाही | जँ ओ मात्र कपार छूबैत छथि आ नाक नहि छूबैत छथि तखन किछु विद्वान कहैत छथि जे ई पर्याप्त अछि । जखन कि दोसर लोक कहैत छथि जे जा धरि नाक आ कपार पर सजदा नहि करब ता धरि पर्याप्त नहि अछि'।