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Rasulullah melarang pertanyaan yang memberatkan kaum muslimin
Imam Abu Dawud : 3994حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَعْظَمَ الْمُسْلِمِينَ فِي الْمُسْلِمِينَ جُرْمًا مَنْ سَأَلَ عَنْ أَمْرٍ لَمْ يُحَرَّمْ فَحُرِّمَ عَلَى النَّاسِ مِنْ أَجْلِ مَسْأَلَتِهِ
हमसे कहा गा है [उथमान बिन अबू स्याबा] ने कहा, हमसे [सुफयान] से [अज जुहरी] से [अमीर बिन सद] से [उनके पिता] से कहा गया है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, एक मुसलमान जेकर सबसे बड़ी बुराई मुसलमानन के खिलाफ उ है जेकरे बारे में कुछ अइसन है जे तब अचानक नाहीं रहा है, अपने प्रश्न के कारण के कारण सब मनुष्यन के लिए मना है। ऊ'।