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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 318

حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ قَالَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ طَاوُسٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَرُخِّصَ لِلْحَائِضِ أَنْ تَنْفِرَ إِذَا حَاضَتْوَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يَقُولُ فِي أَوَّلِ أَمْرِهِ إِنَّهَا لَا تَنْفِرُ ثُمَّ سَمِعْتُهُ يَقُولُ تَنْفِرُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَخَّصَ لَهُنَّ

हमें बताया है [मुअल्ला बिन असद] ने कहा, हमें [वुहैब] ने [अब्दुल्ला बिन थावस] से [अपने पिता] से [इब्न अब्बास] से बताया है, "मासिक धर्म वाली महिलाओं को नफ़र (मीना छोड़ने) के लिए राहत दी जाती है, और पहले [इब्न उमर] ने इसे मना किया था, लेकिन फिर मैंने उसे कहते सुना, 'मासिक धर्म वाली महिलाएं नफ़र कर सकती हैं क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके लिए राहत प्रदान की है।"

समर्थक हदीस :

इमाम बुखारी : 318, 1640
इमाम दरिमी : 1852, 1853