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Disyariatkannya mandi: disyariatkannya mandi: harus mandi karena memandikan jenazah
Imam Tirmidzi : 914حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ الْمُخْتَارِ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مِنْ غُسْلِهِ الْغُسْلُ وَمِنْ حَمْلِهِ الْوُضُوءُ يَعْنِي الْمَيِّتَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَائِشَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ مَوْقُوفًا وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الَّذِي يُغَسِّلُ الْمَيِّتَ فَقَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ إِذَا غَسَّلَ مَيِّتًا فَعَلَيْهِ الْغُسْلُ و قَالَ بَعْضُهُمْ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ و قَالَ مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ أَسْتَحِبُّ الْغُسْلَ مِنْ غُسْلِ الْمَيِّتِ وَلَا أَرَى ذَلِكَ وَاجِبًا وَهَكَذَا قَالَ الشَّافِعِيُّ و قَالَ أَحْمَدُ مَنْ غَسَّلَ مَيِّتًا أَرْجُو أَنْ لَا يَجِبَ عَلَيْهِ الْغُسْلُ وَأَمَّا الْوُضُوءُ فَأَقَلُّ مَا قِيلَ فِيهِ و قَالَ إِسْحَقُ لَا بُدَّ مِنْ الْوُضُوءِ قَالَ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ أَنَّهُ قَالَ لَا يَغْتَسِلُ وَلَا يَتَوَضَّأُ مَنْ غَسَّلَ الْمَيِّتَ
एह् असेंगी [मुहम्मद बिन अब्दुल मलिक बिन अबू असी स्यावरीब] ने दस्सेआ ऐ, एह् असेंगी [अब्दुल अजीज बिन अल मुख्तार] ने [सुहैल बिन अबू सालिह] कोला [अपने पिता] कोला [अबू हुरैराह] कोला नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोला दस्सेआ ऐ जिने आखेआ हा: 'मृतक गी धोने दे बाद उसी स्नान करना होग ते उसी लीफ करने दे बाद उसी वज़ूद करना होग'। -अबू ईसा तिरमिधी पर- ने कहा; 'हदीस अली ते 'ऐस्याह' तों रिवायत होई है। अबू ईसा ने आख्या; 'अबू हुरैरा दी हदीस हसन हदीस है।' यह हदीस अबू हुरैरा मौकुफ से भी रिवायत की गई है। लाशें गी नहाने आह्ले लोकें दे बारे च विद्वानें दा मतभेद। उंदे च किश नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे साथियें च शामल हे ते किश इस राय दे हे; 'अगर ओह् मरे दे शरीर गी नहांदा ऐ तां उसी नहाना बाध्य ऐ'। ते उंदे च किश सोचदे न; 'उसी बस वज़ूद करना है'। मालिक बिन अनस ने आख्या; 'मैं मरे दे धोने दे बाद नहाना पसंद करदा हां, पर इसगी अनिवार्य नेईं समझना'। इसी तयह शाफीई की राय। अहमद ने कहा; 'जिस बंदे ने लाश धोया होवे, मैं उम्मीद करदा हां कि उस नूं नहाण दा फर्ज नहीं है, पर कम से कम वज़ूद तां कर लैंदा है।' इशाक ने आख्या; 'उसी वज़ूद जरूर करना चाइदा'। -अबू ईसा तिरमिधी पर- ने कहा; 'अब्दुल्ला बिन मुबारक तों रिवायत है कि; लाश धोने आले गी नहाने ते वज़ूद करने दा बाध्यता नेईं ऐ।