प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 5688
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَأَنْ يَمْتَلِئَ جَوْفُ أَحَدِكُمْ قَيْحًا خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَمْتَلِئَ شِعْرًا
हमें बताया गया है कि ['उबैदुल्लाह बिन मूसा] ने हमें [हनज़ला] [सलीम] से [इब्न उमर] रदलिल्लाहु अन्हुमा से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उन्होंने कहा: "तुममें से किसी का मवाद से भरा पेट कविता की पंक्तियों से भरे पेट से बेहतर है।"