Hadith Representative
Pintu-pintu surga dibuka pada hari Senin dan Kamis, kecuali bagi orang yang saling mendengki/bermusuhan
Imam Abu Dawud : 4270حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تُفْتَحُ أَبْوَابُ الْجَنَّةِ كُلَّ يَوْمِ اثْنَيْنِ وَخَمِيسٍ فَيُغْفَرُ فِي ذَلِكَ الْيَوْمَيْنِ لِكُلِّ عَبْدٍ لَا يُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا إِلَّا مَنْ بَيْنَهُ وَبَيْنَ أَخِيهِ شَحْنَاءُ فَيُقَالُ أَنْظِرُوا هَذَيْنِ حَتَّى يَصْطَلِحَاقَالَ أَبُو دَاوُد النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَجَرَ بَعْضَ نِسَائِهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَابْنُ عُمَرَ هَجَرَ ابْنًا لَهُ إِلَى أَنْ مَاتَ قَالَ أَبُو دَاوُد إِذَا كَانَتْ الْهِجْرَةُ لِلَّهِ فَلَيْسَ مِنْ هَذَا بِشَيْءٍ وَإِنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ غَطَّى وَجْهَهُ عَنْ رَجُلٍ
हमसे कहिन है [मुसद्दाद] ने कहा, हमसे कहा है [अबू अवाना] से [सुहैल बिन अबू सलीह] से [अपने पिता] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: 'स्वर्ग के दरवाजे हर सोमवार अऊर गुरुवार खुलत हैं, फिर दुइनौ दिन अल्लाह के साथ कुछौ भी साथी न करै के लिए माफ कीन जाई, सिवाय जेकरे भाई से दुश्मनी है, ओकरे बरे। तब ई कहा जाई -देवदूत से-, 'इन दुइनौ लोगन का तब तक इंतजार करा जब तक कि उइ समझौता न करिहैं'। अबू दाऊद ने कहा, 'नबी सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने एक बार अपनी कुछ पत्नियों को चालीस दिन तक चुप कराया, इब्न उमर ने भी अपने बेटे को तब तक चुप कराया जब तक कि वह मर न गया'। अबू दाऊद ने कहा, 'अगर चुप्पी अल्लाह के खातिर है, तौ ई हदीस के -धमकी- लागू नाहीं होत है। उमर बिन अब्दुल अजीज ने एक बार किसी से अपना चेहरा ढक लिया -चुप कर दिया-'।