Rasulullah menyerang yahudi khaibar pada pagi hari dan mengucapkan ‘Allahu Akbar, yahudi khaibar akan berantakan
Imam Bukhari : 895
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ وَثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى الصُّبْحَ بِغَلَسٍ ثُمَّ رَكِبَ فَقَالَ اللَّهُ أَكْبَرُ خَرِبَتْ خَيْبَرُ إِنَّا إِذَا نَزَلْنَا بِسَاحَةِ قَوْمٍ{ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنْذَرِينَ }فَخَرَجُوا يَسْعَوْنَ فِي السِّكَكِ وَيَقُولُونَ مُحَمَّدٌ وَالْخَمِيسُ قَالَ وَالْخَمِيسُ الْجَيْشُ فَظَهَرَ عَلَيْهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَتَلَ الْمُقَاتِلَةَ وَسَبَى الذَّرَارِيَّ فَصَارَتْ صَفِيَّةُ لِدِحْيَةَ الْكَلْبِيِّ وَصَارَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ تَزَوَّجَهَا وَجَعَلَ صَدَاقَهَا عِتْقَهَافَقَالَ عَبْدُ الْعَزِيزِ لِثَابِتٍ يَا أَبَا مُحَمَّدٍ أَنْتَ سَأَلْتَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ مَا أَمْهَرَهَا قَالَ أَمْهَرَهَا نَفْسَهَا فَتَبَسَّمَ
हमसे कहिन है [मुसद्दाद] कहिन, हमसे [हम्मद बिन जैद] [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] से अऊर [त्साबित अल बनानी] से [अनस बिन मलिक] बताइन हैं, कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फजर नमाज पढ़ी जब अंधेरा रहा, फिर उ अपने घोड़े पर सवार होइके कहिन: 'अकबर खबर का नाश करौ! सचमुच, जब हम एक मनई के गाँव मा आवत हैं, -तब चेतावनी दीन गा मनई द्वारा अनुभव कीन गा सुबह बहुत बुरा होत है- -प्रश्न। ऐश शफत: 177-। खैबर के लोग बाहर आए कहिके मुहम्मद और अल खमीस ! तबित कहिन, 'अल खमीस का मतलब है सैनिक'। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनका पराजित किहिन, ओनके सैनिकन का मार डारिन अऊर कैदी बनाइन। तौ शफिया दिह्याह अल कलबी का हिस्सा बनीं, फिर उ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संपत्ति बनीं। फिर उ ओसे शादी किहिन, अऊर ओकर दहेज ओकर रिहाई रहा'। अब्दुल अजीजी ने थाबित से कहा, 'हे अबू मुहम्मद, का तुम अनस बिन मलिक से पूछेव कि ऊ औरत के लिए दहेज के रूप मा का दिहिन?' थाबित जवाब दिहिस, 'उनकर दहेज उनकर रिहाई है'। ऊ भी मुस्कुराइन'।