Tasbih, Tahmid, dan Takbir masing-masing 33 kali setelah shalat wajib ditutup dengan, LAA ILAHA ILLALLAHU WAHDAHU LAA SYARIIKALAH ...
Imam Bukhari : 798
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ سُمَيٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَجَاءَ الْفُقَرَاءُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا ذَهَبَ أَهْلُ الدُّثُورِ مِنْ الْأَمْوَالِ بِالدَّرَجَاتِ الْعُلَا وَالنَّعِيمِ الْمُقِيمِ يُصَلُّونَ كَمَا نُصَلِّي وَيَصُومُونَ كَمَا نَصُومُ وَلَهُمْ فَضْلٌ مِنْ أَمْوَالٍ يَحُجُّونَ بِهَا وَيَعْتَمِرُونَ وَيُجَاهِدُونَ وَيَتَصَدَّقُونَ قَالَ أَلَا أُحَدِّثُكُمْ إِنْ أَخَذْتُمْ أَدْرَكْتُمْ مَنْ سَبَقَكُمْ وَلَمْ يُدْرِكْكُمْ أَحَدٌ بَعْدَكُمْ وَكُنْتُمْ خَيْرَ مَنْ أَنْتُمْ بَيْنَ ظَهْرَانَيْهِ إِلَّا مَنْ عَمِلَ مِثْلَهُ تُسَبِّحُونَ وَتَحْمَدُونَ وَتُكَبِّرُونَ خَلْفَ كُلِّ صَلَاةٍ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ فَاخْتَلَفْنَا بَيْنَنَا فَقَالَ بَعْضُنَا نُسَبِّحُ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَنَحْمَدُ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَنُكَبِّرُ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ فَرَجَعْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ تَقُولُ سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَاللَّهُ أَكْبَرُ حَتَّى يَكُونَ مِنْهُنَّ كُلِّهِنَّ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ
हमसे कहा गा है [मुहम्मद बिन अबू बकर] ने कहा, हमसे [मुतमीर] से [उबैदुल्लाह] से [सुमय्या] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] ने कहा है, 'एक बार जब फुकारा पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए अऊर कहिन, 'अमीर लोग, अपने धन के साथ-साथ, एक उच्च पद भी प्राप्त करत हैं, अनन्त भोग के रूप मा। काहे से कि उइ वइसने प्रार्थना करत हैं जइसे हम प्रार्थना करत हैं। उइ उपवास करत हैं काहे से हम भी शौम करत हैं। हालांकि, उनके पास अपने धन के कारण फायदा है, यहिसे उ इन संपत्तियन से हज कर सकत हैं, उ उमराह भी कर सकत हैं अऊर जेहाद भी कइ सकत हैं अऊर भिक्षा भी दे सकत हैं। त उ कहिन: 'का हम तोहसे कुछ कहब कि अगर तू -पूजा के रूप मा- लेइ - तोहका पराजित करै वालेन के स्तर से आगे निकल पइहैं, अऊर केहू तोहका ई काम से पराजित नाहीं कइ पइहैं ताकि तू तोहरे बीच अऊर ओनके बीच सबसे अच्छा होइ जब तक कि कोई अइसन न होय जउन तू करत हय। यानी, आप हर नमाज के बाद तेतीस बार तस्बीह -सुभानल्लाह- पढ़त हैं, तहमिड -अल्हमदुलिल्लाह- पढ़त हैं अऊर तकबीर -अल्लाहु अकबर- पढ़त हैं'। फिर वहिके बाद हमरे बीच मतभेद होइगा। हममें ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि 'हम तेतीस बार तसबीह करें, फिर तेतीस बार तहमीद करैं, फिर तेतालीस बार तकबीर करैं'। फिर मैं ओनसे सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से मिले वापस गय, उ तब कहिन: 'पढ़ौ 'सुभानल्लाह वल्हमदुलिल्लाह वल्लाहु अकबर' जब तक कि कुल तेतीस बार न होइ जाय'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 702, 1085, 1185, 6616, 6945, 8478, 9878, 20617, 20672, 25340
Imam Bukhari : 798, 2881, 3429, 4942, 4943, 5843
Imam Muslim : 936, 937, 938, 939, 4906, 4907
Imam Abu Dawud : 1286, 2594, 2595, 4403
Imam Tirmidzi : 375, 3330, 3332, 3334, 3335
Imam Nasa'i : 1332, 1333, 1334, 1336, 1337
Imam Ibnu Majah : 917
Imam Malik : 439
Imam Darimi : 1320