Doa menjelang tidur: MEMBACA TASBIH 33x, TAHMID 33x, TAKBIR 34x
Imam Bukhari : 2881
حَدَّثَنَا بَدَلُ بْنُ الْمُحَبَّرِ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَكَمُ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي لَيْلَى حَدَّثَنَا عَلِيٌّأَنَّ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام اشْتَكَتْ مَا تَلْقَى مِنْ الرَّحَى مِمَّا تَطْحَنُ فَبَلَغَهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِسَبْيٍ فَأَتَتْهُ تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَلَمْ تُوَافِقْهُ فَذَكَرَتْ لِعَائِشَةَ فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَتْ ذَلِكَ عَائِشَةُ لَهُ فَأَتَانَا وَقَدْ دَخَلْنَا مَضَاجِعَنَا فَذَهَبْنَا لِنَقُومَ فَقَالَ عَلَى مَكَانِكُمَا حَتَّى وَجَدْتُ بَرْدَ قَدَمَيْهِ عَلَى صَدْرِي فَقَالَ أَلَا أَدُلُّكُمَا عَلَى خَيْرٍ مِمَّا سَأَلْتُمَاهُ إِذَا أَخَذْتُمَا مَضَاجِعَكُمَا فَكَبِّرَا اللَّهَ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ وَاحْمَدَا ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَسَبِّحَا ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ فَإِنَّ ذَلِكَ خَيْرٌ لَكُمَا مِمَّا سَأَلْتُمَاهُ
हमसे कहिन [बदल बिन अल मुहब्बार] हमसे कहिन हैं [स्युबाह] कहिन कि उ हमसे कहिन हैं [अल हकाम] कहिन कि हम सुने रहेन [इब्न अबी लैला] हमसे [अली] बताइन हैं कि फातिमा अलैहास सलाम एक बार शिकायत किहिन कि उ आटा पीसय अऊर पीसय के कारण का अनुभव किहिन। फिर ओनका खबर मिली कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का बंदी बनावा गा है, तौ उ ओनके पास गें अऊर एक नौकर के मांग किहिन लेकिन उ मानिन नाहीं। तब फातिमा ने ऐसिया को अपने केस के बारे में बताया। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए तो ऐसिया ने उन्हें यह बात बताई। तौ जब हम आराम करै बिस्तर पर गये रहेन तौ ऊ हमरे दुइनौ के पास आवा अऊर कहिस: 'वहिँ रहौ'। जब तक कि हम अपने छाती के पास ओकर दुइ ठंडा गोड़ नाहीं पाएन। उ कहिन: 'का तुम दुइनौ चाहत हौ कि हम तुमका कुछ बेहतर देखावा जवन तुम दुइनौ माँगे रहेव, अर्थात्, अगर तुम पहिले से ही अपने बिस्तर मा हौ, तौ तकबीर -अल्लाहु अकबर- चौंतीस बार, हमदाला -अल्हमदुलिल्लाह- तेतीस बार अऊर तस्बीह -सुभानल्लाह- तेतीस बार पढ़ौ काहे से कि वास्तव मा ई पढ़ाई आप दुइनौ के मांग से बेहतर है'।