Imam Ahmad : 25545
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعَيْبٌ قَالَ قَالَ نَافِعٌ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّ أَبَا الْجَرَّاحِ مَوْلَى أُمِّ حَبِيبَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ أَنَّ أُمَّ حَبِيبَةَ أَخْبَرَتْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْعِيرَ الَّتِي فِيهَا الْجَرَسُ لَا تَصْحَبُهَا الْمَلَائِكَةُ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू अल यमन] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [स्यूअइब] कहलक अछि, [नाफी’] कहलक अछि, हमरा [सलीम बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलक अछि जे [अबू जराह] उम्म हबीबाहक पूर्व दास, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमक पत्नी, अब्दुल्लाह बिन उमरसँ कहलक जे [उम्मू हबीबाह] ओकरा ई बात कहलक रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सत्ते, फरिश्ता ओहि यात्रीक समूहक संग नहि करताह जिनका पर घंटी होयतनि'।