Imam Ahmad : 23049
حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ الْمَعْنَى قَالَا حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ مُسْلِمٍ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ دَخَلَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلَانِ فَأَغْلَظَ لَهُمَا وَسَبَّهُمَا قَالَتْ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَمَنْ أَصَابَ مِنْكَ خَيْرًا مَا أَصَابَ هَذَانِ مِنْكَ خَيْرًا قَالَتْ فَقَالَ أَوَمَا عَلِمْتِ مَا عَاهَدْتُ عَلَيْهِ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ قَالَ قُلْتُ اللَّهُمَّ أَيُّمَا مُؤْمِنٍ سَبَبْتُهُ أَوْ جَلَدْتُهُ أَوْ لَعَنْتُهُ فَاجْعَلْهَا لَهُ مَغْفِرَةً وَعَافِيَةً وَكَذَا وَكَذَا
हमका [अबू मुआविया] अऊर [इब्न नुमीर] का अर्थ मा बतावा है, दुइनौ कहिन; 'ई हमसे [अल-अमासी] से [मुस्लिम] से [मसरूक] से [आइशा] से संबंधित रहा है; 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से मिले दुइ मनई रहे, फिर उ दुइनौ के प्रति कठोर रहे अऊर ओनके आलोचना किहिन'। -ऐस्याह- कहिन; हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल! सचमुच, जो भलाई तोहसे मिली है, ऊ इन दुइनौ मनई तोहसे नाहीं पाई है'। -ऐस्याह- कहिन; तब अल्लाह के रसूल ने कहा: 'का तुम जानत हौ कि हम अपने रोब अज्जावाजल्ला के साथे जवन समझौता किहे हई?' उ कहिन: 'मैं हमेशा कहत हउँ: 'हे अल्लाह, हर आस्तिक जेकरे मैं आलोचना करत हउँ, मारत हउँ या गाली देत हउँ, ओका माफ अऊर माफ कीन जाय, अऊर वइसने अऊर वइसन'।'