Imam Ahmad : 21737
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ اطَّلَعَ رَجُلٌ مِنْ جُحْرٍ فِي حُجْرَةِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَعَهُ مِدْرًى يَحُكُّ بِهِ رَأْسَهُ فَقَالَ لَوْ أَعْلَمُكَ تَنْتَظِرُ لَطَعَنْتُ بِهِ عَيْنَكَ إِنَّمَا جُعِلَ الِاسْتِئْذَانُ مِنْ أَجْلِ الْبَصَرِ
हमका [सुफयान] से [अज जुहरी] से [सहल बिन साद] से कहा गा है: एक अइसन व्यक्ति रहा जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कमरा मा एक छेद से झांकत रहा, जबकि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक कंघी लइके जात रहें जेहिका उ अपने सिर मा कंघी किहिन -अपने बालन का- तब पैगम्बर सल्लल्लाम ने कहा: 'अगर मैं तोहका झांकत पाउब तौ मैं तोहार आँखिन का चोंच मारब, असल मा प्रवेश करै के अनुमति माँगब। घर- ई दृश्य के खातिर है'।