Larangan mengimami shalat dengan bacaan surat yang panjang supaya tidak terjadi fitnah
Imam Bukhari : 660
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرٍو قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكَانَ مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ يُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ يَرْجِعُ فَيَؤُمُّ قَوْمَهُ فَصَلَّى الْعِشَاءَ فَقَرَأَ بِالْبَقَرَةِ فَانْصَرَفَ الرَّجُلُ فَكَأَنَّ مُعَاذًا تَنَاوَلَ مِنْهُ فَبَلَغَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ فَتَّانٌ فَتَّانٌ فَتَّانٌ ثَلَاثَ مِرَارٍ أَوْ قَالَ فَاتِنًا فَاتِنًا فَاتِنًا وَأَمَرَهُ بِسُورَتَيْنِ مِنْ أَوْسَطِ الْمُفَصَّلِقَالَ عَمْرٌو لَا أَحْفَظُهُمَا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [घुन्दर] कहिन, हमसे कहिन [स्युबाह] से [अमरू] कहिन, हम [जाबिर बिन अब्दुल्ला] का कहत सुने रहेन, 'मुआज़ बिन जबल एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे नमाज पढ़िन, फिर उ सुशल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे अपने लोगन का नेतृत्व किहिन बकराह। फिर एक आदमी बाहर आवा अऊर चला गा, मुआदज़ लागत रहा कि ई मनई का कुछ बुरा कहत है। यह घटना तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक पहुँची, तो उन्होंने कहा: 'का तुम बदनामी करै जात हौ? का तुम बदनामी करै जात हौ? बदनामी करै जात हौ का?' ऊ तीन बार कहिस। या कहिस: 'का तू निन्दा करै वाला अहा? का तुम निंदा करै वाले हौ? बदनामी बन गये हौ का?' फिर उ ओका -मुआद्ज- अल मुफशशाल के बीच से केवल दुई सूरा पढ़ै का आदेश दिहिन। अमरू बोले- 'लेकिन ई दूनौ अक्षर हमका रट के नाहीं आवत है'।