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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Bacalah al-a'laa, atau asy-syams atau al-lail dalam shalat isya

Imam Bukhari : 5641

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَادَةَ أَخْبَرَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا سَلِيمٌ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ كَانَ يُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ يَأْتِي قَوْمَهُ فَيُصَلِّي بِهِمْ الصَّلَاةَ فَقَرَأَ بِهِمْ الْبَقَرَةَ قَالَ فَتَجَوَّزَ رَجُلٌ فَصَلَّى صَلَاةً خَفِيفَةً فَبَلَغَ ذَلِكَ مُعَاذًا فَقَالَ إِنَّهُ مُنَافِقٌ فَبَلَغَ ذَلِكَ الرَّجُلَ فَأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا قَوْمٌ نَعْمَلُ بِأَيْدِينَا وَنَسْقِي بِنَوَاضِحِنَا وَإِنَّ مُعَاذًا صَلَّى بِنَا الْبَارِحَةَ فَقَرَأَ الْبَقَرَةَ فَتَجَوَّزْتُ فَزَعَمَ أَنِّي مُنَافِقٌ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا مُعَاذُ أَفَتَّانٌ أَنْتَ ثَلَاثًا اقْرَأْ وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا وَسَبِّحْ اسْمَ رَبِّكَ الْأَعْلَى وَنَحْوَهَا

"हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दाह] हमसे कहिन हैं [यजीद] हमसे कहिन हैं [सलीम] हमसे कहिन हैं [अमरू बिन दीनार] हमसे कहिन हैं [जाबिर बिन अब्दुल्ला] कि मुआज़ बिन जबल रदलियाल्लाहु अन्हू एक बार -पीछे- रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु अलैहि वसलम ने प्रार्थना किहिन, फिर उ प्रार्थना पढ़ के अपने लोगन के पास लौटि आए पत्र अल बकराह," जाबीर ने जारी रखा; 'फिर एक आदमी बाहर आवा - पंक्ति से - अऊर उ एकदम हल्का प्रार्थना किहिन, जाहिर तौर पर ई मुअदज़ तक पहुँचा, उ कहिन; 'वास्तव मा ऊ एक पाखंडी है'। जब मुआज़ के बात उ आदमी तक पहुँची, त उ आदमी तुरंत पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा अऊर बोला; 'हे अल्लाह के रसूल, वास्तव मा हम एक अइसन लोग हैं जेकर काम खेतन का पानी देब है, जबकि कल रात मुआज़ नमाज पढ़िन, सूरा अल बकरा पढ़ के हमका अगुवाई किहिन, जब तक कि हम पंक्ति से बाहर न निकल गयेन, तब तक उ हमका पाखंडी समझिन।' तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे मुआज़, क्या तुम बदनामी करने जा रहे हो'। -उ तीन बार कहिन- पढ़ा वास स्यामसी वाडलुहाहा अऊर वसब्बिह बिस्मिरब्बिकल अ'ला या कुछ अइसन'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 11799, 13675, 13787
Imam Bukhari : 660, 664, 5641
Imam Muslim : 709, 710
Imam Abu Dawud : 671
Imam Nasa'i : 822, 826, 988
Imam Ibnu Majah : 976
Imam Darimi : 1263