Hukum tentang memakan hasil buruan anjing terlatih dan panah yang dilepaskan dengan menyebut nama Allah
Imam Ahmad : 18579
حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي زَائِدَةَ وَعَاصِمٌ الْأَحْوَلُ عَنِ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ صَيْدِ الْمِعْرَاضِ فَقَالَ مَا أَصَابَ بِحَدِّهِ فَكُلْ وَمَا أَصَابَ بِعَرْضِهِ فَهُوَ وَقِيذٌ وَسَأَلْتُ عَنْ صَيْدِ الْكَلْبِ فَقَالَ إِذَا أَرْسَلْتَ كَلْبَكَ وَذَكَرْتَ اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهِ فَأَمْسَكَ عَلَيْكَ فَكُلْ وَإِنْ وَجَدْتَ مَعَهُ كَلْبًا غَيْرَ كَلْبِكَ وَقَدْ قَتَلَهُ وَخَشِيتَ أَنْ يَكُونَ قَدْ أَخَذَ مَعَهُ فَلَا تَأْكُلْ فَإِنَّكَ ذَكَرْتَ اسْمَ اللَّهِ عَلَى كَلْبِكَ وَلَمْ تَذْكُرْهُ عَلَى غَيْرِهِ
हमसे कहिन है [यजीद] हमसे [जकरिया बिन अबू जाइदा] अऊर [अशिम अल अहवाल] से [अश स्याबी] से [आदि बिन हातिम] कहिन हैं; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से शैदुल मि'रादल के बारे मा पूछेन - एक खेल जानवर जेका भाला से मारा गा रहा, लेकिन ई तेज हिस्सा नाहीं रहा जवन निशाना मारा। सो उन्होंने जवाब दिया: 'जो शिकार जानवर भाला के नोक से मारा जाय, उसे खाओ। अऊर एक जानवर जवन भाला के दूसर हिस्सा से टकरा जात है अऊर मर जात है, उ एक वाकिज़ है - एक जानवर जेका एक अइसन औजार का उपयोग कइके मारा जात है जवन तेज नाहीं है, एक कुंद वस्तु-'। फिर हम शैदुल कलबी -कुत्ता शिकारी- के बारे मा फिर से पूछेन। तो उन्होंने जवाब दिया: 'अगर तुम अपने कुत्ते को छोड़कर अल्लाह अज्जा वजल्ला का नाम बोलो, और कुत्ता आपके लिए शिकार पकड़ ले, तो खाओ। अऊर अगर तुमका अपने कुत्ते के साथे दूसर कुत्ता मिल जात है, अऊर खेल मर जात है, अऊर तुमका डर है कि कुत्ता ओका मार देई, तौ ओका न खाओ। काहे से कि तुम अपने कुत्ते के ऊपर केवल अल्लाह का नाम लेत हौ, अऊर कुछौ नाहीं'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 17067, 17071, 17544, 17547, 17554, 18562, 18563, 18574, 18579, 18580, 18581, 18582
Imam Bukhari : 1913, 5054, 5061, 5062, 5064, 6848
Imam Muslim : 3560, 3561, 3562, 3563, 3564, 3565, 3566
Imam Abu Dawud : 2464, 2465, 2469, 2471
Imam Tirmidzi : 1384, 1389, 1390, 1391
Imam Nasa'i : 4190, 4191, 4192, 4194, 4197, 4198, 4199, 4200, 4201, 4222, 4224, 4225, 4231, 4232, 4233, 4234
Imam Ibnu Majah : 3199, 3205
Imam Darimi : 1924