Hukum memakan hewan buruan yang terkena anak panah tanpa mata (tumpul)
Imam Ahmad : 18562
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا مُجَالِدٌ وَزَكَرِيَّا وَغَيْرُهُمَا عَنِ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ صَيْدِ الْمِعْرَاضِ فَقَالَ مَا أَصَابَ بِحَدِّهِ فَخَرَقَ فَكُلْ وَمَا أَصَابَ بِعَرْضِهِ فَقَتَلَ فَإِنَّهُ وَقِيذٌ فَلَا تَأْكُلْ
हमका बताइस है [हुसैम] हमसे [मुजालिद] अऊर [जकरिया] बताइस है अऊर इन दुइनौ के अलावा, [अश स्याबी] से [आदि बिन हातिम] से उ कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से शैदुल मि'रादल के बारे मा पूछेन - एक खेल जानवर जेका भाला से मारा गा रहा, लेकिन ई तेज हिस्सा नाहीं रहा जवन निशाना मारा। तौ ऊ जवाब दिहिस: 'जउन शिकार जानवर भाला के नोक से मारा गा रहा अऊर मर गा रहा, तौ ओका खावा। अऊर अगर कौनो जानवर भाला के दूसर हिस्सा से टकरा जात है अऊर मर जात है, तौ ई एक वाकिज़ है - एक जानवर जेका एक अइसन औजार से मारा जात है जवन तेज या कुंद नाहीं है - यहिसे, ओका न खावा जाय'।