Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam sujud di atas air dan lumpur hingga tampak sisa tanah becek pada dahi beliau
Imam Bukhari : 629
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ يَحْيَى عَنْ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ فَقَالَجَاءَتْ سَحَابَةٌ فَمَطَرَتْ حَتَّى سَالَ السَّقْفُ وَكَانَ مِنْ جَرِيدِ النَّخْلِ فَأُقِيمَتْ الصَّلَاةُ فَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْجُدُ فِي الْمَاءِ وَالطِّينِ حَتَّى رَأَيْتُ أَثَرَ الطِّينِ فِي جَبْهَتِهِ
हमसे कहिन [मुस्लिम बिन इब्राहिम] कहिन, हमसे कहिन [हिस्याम] से [यह्या] से [अबू सलामा] कहिन, 'मैंने [अबू सईद अल खुदरी] से पूछा -लैलातुल कादर के बारे मा-'। फिर उ जवाब दिहिन, 'एक दिन बहुत बादर रहे - बादल छाए रहे - अऊर फिर तेज बारिश भै जब तक कि मस्जिद के छत बरसात के पानी से लीक नाइ होइ गै। ऊ समय छत अबहियों खजूर के पत्तन से बनी रही। जब नमाज पढ़ी जात रही तौ हम देखेन कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पानी अउर कीचड़ के ऊपर तब तक सजदा करत रहें जब तक कि उनके माथे मा कीचड़ भरी गंदगी नजर नहीं आवत रही।'