Tidak memahramkan satu atau dua kali hisapan
Imam Ahmad : 15537
قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِيهِ عَنِ ابْنِ الزُّبَيْرِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُحَرِّمُ الْمَصَّةُ وَالْمَصَّتَانِ
-अहमद बिन हनबल- कहिन; हमका [वाकी'] अऊर [हिस्याम] से [अपने पिता] से कहे से कहिन है; [इब्न जुबैर] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'यह हराम नहीं बनता - कोई शादी कर लेत है - सिर्फ एहसे कि उ एक या दुई बार धूम्रपान किहिन'।