Kesaksian Abu sufyan tentang akhlak dan kenabian Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam di hadapan kaisar heraclius
Imam Ahmad : 14211
حَدَّثَنَا مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْدَى إِلَيْهِ رَاهِبٌ مِنْ الشَّامِ جُبَّةً مِنْ سُنْدُسٍ فَلَبِسَهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ أَتَى الْبَيْتَ فَوَضَعَهَا وَأُخْبِرَ بِوَفْدٍ يَأْتِيهِ فَأَمَرَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَنْ يَلْبَسَ الْجُبَّةَ لِقُدُومِ الْوَفْدِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَصْلُحُ لَنَا لِبَاسُهَا فِي الدُّنْيَا وَيَصْلُحُ لَنَا لِبَاسُهَا فِي الْآخِرَةِ وَلَكِنْ خُذْهَا يَا عُمَرُ فَقَالَ أَتَكْرَهُهَا وَآخُذُهَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَا آمُرُكَ أَنْ تَلْبَسَهَا وَلَكِنْ تُرْسِلُ بِهَا إِلَى أَرْضِ فَارِسَ فَتُصِيبُ بِهَا مَالًا فَأَبَى عُمَرُ فَأَرْسَلَ بِهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى النَّجَاشِيِّ وَكَانَ قَدْ أَحْسَنَ إِلَى مَنْ فَرَّ إِلَيْهِ مِنْ أَصْحَابِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिन है [मूसा] हमसे कहिन है [इब्नू लाहिअह] से [अबू अज़ जुबैर] से [जाबिर], रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का एक बार एक सीरियाई पुजारी से एक उपहार मिला रहा। उपहार एक रेशमी बागा रहा। फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ओका पहिना अऊर मंदिर मा आके ओका वापस लगावा। तब खबर आई कि उनके पास एक दूत आवत है, तौ उमर बिन अल खोत्तोब ने उनसे कहा कि दूत के आगमन का स्वागत करै के लिए बागा पहनौ। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि 'हमरे लिए ई दुनिया मा पहनब जायज नाहीं है लेकिन हम परलोक मा पहन सकत हैं। ले जा ओ उमर! -'उमर रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; तुम नफरत करत हौ फिर हम लेत हई?। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं तुमसे ई नाहीं कहत हउँ कि ई पहिरौ बल्कि ईका फारस भेजौ ताकि तुमका धन मिल सकै'। लेकिन उमर मना कइ दिहिन। फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनका नजस्यी के पास भेजिन, जे पैगम्बर मुहम्मद के अपने देश मा आए दोस्तन के साथ भला किहिन रहैं।