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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



hendaklah yang mengimami shalat kalian adalah yang paling tua di antara kalian

Imam Bukhari : 595

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌأَتَيْنَا إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ شَبَبَةٌ مُتَقَارِبُونَ فَأَقَمْنَا عِنْدَهُ عِشْرِينَ يَوْمًا وَلَيْلَةً وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَحِيمًا رَفِيقًا فَلَمَّا ظَنَّ أَنَّا قَدْ اشْتَهَيْنَا أَهْلَنَا أَوْ قَدْ اشْتَقْنَا سَأَلَنَا عَمَّنْ تَرَكْنَا بَعْدَنَا فَأَخْبَرْنَاهُ قَالَ ارْجِعُوا إِلَى أَهْلِيكُمْ فَأَقِيمُوا فِيهِمْ وَعَلِّمُوهُمْ وَمُرُوهُمْ وَذَكَرَ أَشْيَاءَ أَحْفَظُهَا أَوْ لَا أَحْفَظُهَا وَصَلُّوا كَمَا رَأَيْتُمُونِي أُصَلِّي فَإِذَا حَضَرَتْ الصَّلَاةُ فَلْيُؤَذِّنْ لَكُمْ أَحَدُكُمْ وَلْيَؤُمَّكُمْ أَكْبَرُكُمْ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल वहाब] कहिन, हमसे [अय्यूब] [अबू किलाबा] से कहिन, हमसे [मलिक] कहिन, 'हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले आये रहेन, उ समय हम उहै उमर के जवान रहेन। यहिसे हम बीस दिन बीस रात उनके साथै रहेन। ऊ बहुतै प्यार करै वाला अऊर कोमल मनई अहै। जब उ सोचिन कि हम अपने परिवारन का चाहत रहेन, या याद करत रहेन, तौ उ हमसे उन लोगन के बारे मा पूछिन जेका हम पीछे छोड़ दिहे रहेन। यहिसे हम उनका यहिके बारे मा बतायेन। फिर उ कहिन: 'अपने परिवारन के पास वापस जा अऊर ओनके साथे रह, ओनका सिखावा अऊर ओनका आदेश द -प्रार्थना करै-'। फिर उ कुछ अइसन बात बताइन जवन हमका याद रहा अऊर फिर भूल गवा रहा। उ कहिन: 'जइसे तुम मोका प्रार्थना करत देखत हौ, वइसे ही प्रार्थना करा। तो जब नमाज का समय आ जाय तो आप में से कोई एक अज़ान करे, और आप में से सबसे बड़ा इमाम हो।'

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 15045, 15048, 19625
Imam Bukhari : 592, 594, 595, 618, 2636, 6705
Imam Muslim : 1080, 1081
Imam Abu Dawud : 498
Imam Tirmidzi : 189
Imam Nasa'i : 630, 631, 663, 773
Imam Ibnu Majah : 969
Imam Darimi : 1225