Doa Nabi ketika kembali dari perjalanan: AAYIBUUN TAA`IBUUN 'AABIDUUN LIRABBINAA HAAMIDUUN
Imam Ahmad : 12501
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي إِسْحَاقَ قَالَ قَالَ أَنَسٌ أَقْبَلْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَا وَأَبُو طَلْحَةَ وَصَفِيَّةُ رَدِيفَتُهُ عَلَى نَاقَتِهِ فَبَيْنَمَا نَحْنُ نَسِيرُ إِذْ عَثَرَتْ نَاقَةُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَصُرِعَ وَصُرِعَتْ الْمَرْأَةُ فَاقْتَحَمَ أَبُو طَلْحَةَ عَنْ نَاقَتِهِ قَالَ فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ هَلْ ضَرَّكَ شَيْءٌ قَالَ لَا عَلَيْكَ بِالْمَرْأَةِ فَأَلْقَى أَبُو طَلْحَةَ ثَوْبَهُ عَلَى وَجْهِهِ ثُمَّ قَصَدَ الْمَرْأَةَ فَسَدَلَ الثَّوْبَ عَلَيْهَا فَقَامَتْ فَشَدَّ لَهُمَا عَلَى رَاحِلَتِهِمَا فَرَكِبَا وَرَكِبْنَا نَسِيرُ حَتَّى إِذَا كُنَّا بِظَهْرِ الْمَدِينَةِ قَالَ آيِبُونَ تَائِبُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ فَلَمْ يَزَلْ يَقُولُ ذَلِكَ حَتَّى قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ
हमका [इस्माइल] से [यह्या बिन अबू इशाक] से कहा गा है, [अनस] कहिन, मैं रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम, अबू थलहा अऊर शफिया के साथे घरे गय रहौं, जे रसूलल्लाह का अपने ऊँट पर लइके जात रहें। जब हम चलत रहेन त पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ऊंट गिर गवा अऊर उ गिर गवा। शफीया भी। तब अबू तल्हा ऊंट से कूद पड़े ॥ -अनस बिन मलिक राधियाल्लाहुअनहु- कहा, तब अबू तल्हा कहे, हे नबीयुल्लाह, क्या ऐसा है जो तुम्हारे नुकसान पहुंचाता है? ऊ जवाब दिहिस, 'नहीं। बस मोर मेहरारू के मदद करा!'. त अबू तल्हा ने शफिया के ओर आपन कपड़ा ओकरे चेहरा मा फेंक दिहिस अऊर शफिया के ओर आपन कपड़ा बढ़ाइस। फिर -शफीयह- खड़े होकर अपने वाहन में चढ़ गए, फिर हम भी उठकर मदीना के पास तक चलते रहे, जबकि -रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने एक दुआ कही: 'हम लोग हैं जो लौट आए हैं, अल्लाह का पूजा करो, पश्चाताप करो, और स्तुति देने से प्यार करो', हम मदीना पहुंचने तक यही कहते रहे'।