Keutamaan muadzin: mengeraskan suara ketika adzan, kesaksian makhluk terhadap suara muadzin pada hari kiamat
Imam Bukhari : 574
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ قَالَ لَهُإِنِّي أَرَاكَ تُحِبُّ الْغَنَمَ وَالْبَادِيَةَ فَإِذَا كُنْتَ فِي غَنَمِكَ أَوْ بَادِيَتِكَ فَأَذَّنْتَ بِالصَّلَاةِ فَارْفَعْ صَوْتَكَ بِالنِّدَاءِ فَإِنَّهُ لَا يَسْمَعُ مَدَى صَوْتِ الْمُؤَذِّنِ جِنٌّ وَلَا إِنْسٌ وَلَا شَيْءٌ إِلَّا شَهِدَ لَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ أَبُو سَعِيدٍ سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे [अब्दुल्लाह बिन यूसुफ] कहिन, हमसे [मलिक] [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शशाअह अल अंशारी अल मजिनी] से [अपने पिता] से कहिन कि उ ओनसे रिपोर्ट किहिन, कि [अबू सईद अल खुदरी] ओनसे कहिन, 'मैं तोहका बकरी अऊर घाटियन के तरह देखत हई - चरत-। अगर आप अपनी बकरी चर रहे हैं या घाटी में हैं, अऊर आप प्रार्थना के लिए अज़ान कह रहे हैं, तो अपनी आवाज उठाओ। काहे से कि मुआदजिन के आवाज केहू नाहीं सुनत है, चाहे उ मनुष्य होय, जिन्न होय या कुछौ होय, जब तक कि उ क़यामत के दिन गवाह न होइ'। अबू सईद ने कहा, 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है'।