Disyariatkannya adzan: bilal diperintahkan untuk mengumandangkan kalimat adzan dengan genap dan mengganjilkan iqamat
Imam Bukhari : 571
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ هُوَ ابْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ قَالَ أَخْبَرَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَلَمَّا كَثُرَ النَّاسُ قَالَ ذَكَرُوا أَنْ يَعْلَمُوا وَقْتَ الصَّلَاةِ بِشَيْءٍ يَعْرِفُونَهُ فَذَكَرُوا أَنْ يُورُوا نَارًا أَوْ يَضْرِبُوا نَاقُوسًا فَأُمِرَ بِلَالٌ أَنْ يَشْفَعَ الْأَذَانَ وَأَنْ يُوتِرَ الْإِقَامَةَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद] - अर्थात् इब्न सलाम - कहिन, हमसे कहिन हैं [अब्दुल वहाब अत्स त्साकाफी] कहिन हैं, हमसे कहिन हैं [खालिद अल हडजा'] से [अबू किलाबाह] से [अनस बिन मलिक] कहिन, 'जब बहुत से लोग - जे इस्लाम धर्म अपनाइन -, तौ केहू समय के साथ नमाज के प्रवेश का तरीका प्रस्तावित किहिन कि उ कुछ समझ नाहीं पाए। तौ कुछ लोग हैं जे आगि जलावै का सुझाव देत हैं अऊर कुछ लोग भी हैं जे घंटी बजावै का प्रस्ताव देत हैं। तब बिलाल का आदेश मिला कि अज़ान बराबर - दुइ बार दुइ बार - पढ़ा जाय अऊर इकामत का विषम बनावा जाय।