Seorang sabar kesulitan di Madinah dia mati, aku penolongnya di hari kiamat
Imam Ahmad : 11128
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ وثَنَا الْخُزَاعِيُّ أَخْبَرَنَا لَيْثٌ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ مَوْلَى الْمَهْرِيِّ أَنَّهُ جَاءَ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ لَيَالِي الْحَرَّةِ فَاسْتَشَارَهُ فِي الْجَلَاءِ مِنْ الْمَدِينَةِ وَشَكَا إِلَيْهِ أَسْعَارَهَا وَكَثْرَةَ عِيَالِهِ وَأَخْبَرَهُ أَنَّهُ لَا صَبْرَ لَهُ عَلَى جَهْدِ الْمَدِينَةِ فَقَالَ وَيْحَكَ لَا آمُرُكَ بِذَلِكَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَصْبِرُ أَحَدٌ عَلَى جَهْدِ الْمَدِينَةِ وَلَأْوَائِهَا فَيَمُوتُ إِلَّا كُنْتُ لَهُ شَفِيعًا أَوْ شَهِيدًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِذَا كَانَ مُسْلِمًا
म्हानै बतायो गयो है [हज्जाज] कह्यो; म्हानै [लैट्स] बतायो है अर म्हानै बतायो है [अल खुजाई] कह्यो; म्हानै [लैट्स] कैय'र रिपोर्ट करी है; अल माहरी रै एक पूर्व दास [अबू सईद] सूं [सईद बिन अबू सईद] नै बतायो है कै वो एक घणी गर्मी री रात नै [अबू सईद अल खुदरी] रै कनै आयो हो अर उणनै मदीना शहर नै छोड़बाळा लोगां रै बारै में सलाह-मशविरा करण रो न्योतो दियो हो, अर उणनै ऊंची कीमतां अर परिवारां री मोटी संख्या रै बारै में भी शिकायत करी ही जिणनै उणरै कनै समर्थन करणो हो। उण अबू सईद अल खुदरी नै भी बतायो कै वो मदीना री हालत सूं अधीर है। तो अबू सईद अल खुदरी कह्यो; 'हाय थारै माथै, म्हैं थानै ओ करण रो हुकम कोनी दियो, साची म्हैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम नै कैता सुण्यो है: 'कोई भी मदीना रै जीवन री कठिनाइयां अर कठिनाइयां नै धीरज नीं राखै जद तांई बो मर जावै, सो म्हैं उणरै वास्तै एक शौफ्तार बणूंला, या जे बो मुसलमान है तो म्हैं उणरै वास्तै गवाह बणूंला'।