Rahmat-Ku telah mendahului murka-Ku
Imam Ahmad : 8346
حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنِ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَمَّا قَضَى اللَّهُ الْخَلْقَ كَتَبَ فِي كِتَابٍ فَهُوَ عِنْدَهُ فَوْقَ الْعَرْشِ إِنَّ رَحْمَتِي غَلَبَتْ غَضَبِي
हमसे कहिन है [हुसैन] हमसे कहिन है [इब्न अबू अज़ जिनाद] से [अपने पिता] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'जब अल्लाह सब प्राणी के भाग्य तय करत है, त अल्लाह एक किताब मा लिखत है जवन सिंहासन के ऊपर ओकरे पक्ष मा है, अर्थात्; सचमुच, मोर दया मोर क्रोध पर विजय प्राप्त करत है'।