Miskin tidak memiliki kecukupan namun dia malu untuk tidak meminta-minta
Imam Ahmad : 7225
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيْسَ الْمِسْكِينُ الَّذِي تَرُدُّهُ التَّمْرَةُ وَالتَّمْرَتَانِ وَالْأُكْلَةُ وَالْأُكْلَتَانِ قَالُوا فَمَنْ الْمِسْكِينُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الَّذِي لَا يَجِدُ غِنًى وَلَا يَعْلَمُ النَّاسُ بِحَاجَتِهِ فَيُتَصَدَّقَ عَلَيْهِ قَالَ الزُّهْرِيُّ وَذَلِكَ هُوَ الْمَحْرُومُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ هَذَا الْحَدِيثِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَنْ الْمِسْكِينُ قَالَ الَّذِي لَيْسَ لَهُ غِنًى وَلَا يَسْأَلُ النَّاسَ إِلْحَافًا
हमका [अब्दुल अ'ला] से [ममर] से [अज जुहरी] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैराह] से बतावा गा है, कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि व सलाम कहिन: 'इ गरीब नाहीं कहा जात है जेका अस्वीकार कीन जात है - एक या दुइ खजूर, या एक या दुइ भाग भोजन पावै मा विफल हो जात है'। मित्रन ने पूछा; 'फिर कौन गरीब कहलाता है हे रसूल अल्लाह?' उ जवाब दिहिन: 'वह एक अइसन मनई है जेकरे पास पर्याप्त नाहीं है, लेकिन लोग ओकर जरूरतन का नाहीं जानत हैं तौ उ ओमा निवेश कइ सकत हैं'। अज जुहरी ने कहा: 'वह लोग हैं जिनका रोजी-रोटी नहीं मिलत है'। ई हमका [अब्दुल अ'ला] द्वारा [ममर] से [मुहम्मद बिन जियाद] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि व सलाम से बतावा गा है, जइसे कि ऊपर बताई गई हदीस मा है, लेकिन अबू हुरैरा कहिन; मित्रन ने पूछा; 'हे रसूल अल्लाह, फिर कौन गरीब कहलाता है?' उ जवाब दिहिन: 'जिनके पास पर्याप्त नाहीं है, अऊर लोगन से तत्काल नाहीं पूछत हैं'।