Tidak pantas memukul istri di siang hari, lalu menggaulinya di malam hari
Imam Bukhari : 5582حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَمْعَةَ قَالَنَهَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَضْحَكَ الرَّجُلُ مِمَّا يَخْرُجُ مِنْ الْأَنْفُسِ وَقَالَ بِمَ يَضْرِبُ أَحَدُكُمْ امْرَأَتَهُ ضَرْبَ الْفَحْلِ أَوْ الْعَبْدِ ثُمَّ لَعَلَّهُ يُعَانِقُهَاوَقَالَ الثَّوْرِيُّ وَوُهَيْبٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ هِشَامٍ جَلْدَ الْعَبْدِ
सानु दस्सेया है [अली बिन अब्दुल्लाह] ने सानु [सुफयान] [हिशाम] तों [अपने पिता] तों [अब्दुल्लाह बिन ज़म'आह] तों दस्सेया है उसने आख्या; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसे गी उस चीज़ उप्पर हंसने थमां मना करी दित्ता जेह्ड़ी कुसै होर माह्नू थमां निकली ऐ - मतलब दुए माह्नू दा मजाक उड़ाना -'। उन्हां ने वी आख्या: 'तुहाडे विचों कोई अपनी घरेआली नू क्यों मारदा है जिवें ओ अपने घोड़े या गुलाम नू मारदा है, काश ओ अपनी घरेआली नू गले लगा सकदा'। [अतस त्सौरी], [वुहैब] ते [अबू मुअवियाह] ने [हिस्यम] तों आख्या अर्थात; 'जैसे गुलाम को कोड़े मारना'।