Nabi mengangkat kedua tangannya ketika masuk shalat, yaitu bertakbir
Imam Ahmad : 5027
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا اسْتَفْتَحَ الصَّلَاةَ وَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَرْكَعَ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ وَلَا يَفْعَلُ ذَلِكَ فِي السُّجُودِ
हमसे कहा गा है [अब्दुर्रहमान] ने हमसे [मलिक] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [इब्नू उमर] से कहा है, कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज शुरू करत समय दुइनौ हाथ उठावत रहें, प्रणाम करै जात समय, प्रणाम करै से उठत रहें लेकिन सजदा करत समय अइसन नाहीं करत रहें'।